अब पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने का समय आ गया है। केंद्र सरकार को पाकिस्तान से सभी तरह के कूटनीतिक रिश्ते खत्म कर लेने चाहिए।
यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने रविवार को रामलीला मैदान में बिजली की बढ़ती कीमतों के विरोध में आयोजित रैली के दौरान कही।
भाजपा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से पूछा कि आखिर कब तक पाकिस्तान के साथ वार्ता का दौर चलता रहेगा और जवानों के सिर कलम होते रहेंगे। अगर समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो पाकिस्तान की इतनी हिम्मत नहीं होती।
सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ऐलान करना होगा कि वे पाकिस्तान के पीएम के साथ कोई बातचीत नहीं करेंगे।
पाक के नापाक इरादों के कारण ही बार-बार देश के मान-सम्मान को चोट पहुंचती है। राष्ट्र का मान-सम्मान और स्वाभिमान बहुत जरूरी है।
बातचीत के खिलाफ खोला मोर्चा
राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मांग की कि वह साफ तौर पर घोषित करें कि भारत को पाकिस्तान से बातचीत गवारा नहीं है।
पिछले सप्ताह पार्टी के राजनाथ सिंह के साथ ही लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज ने पीएम से मुलाकात के दौरान भी पाक से वार्ता का विरोध किया था।
आडवाणी ने रविवार को भी अपने ब्लॉग पर पाक से वार्ता का अप्रत्यक्ष विरोध किया। रक्षा मंत्री एके एंटनी के बयान के विवाद का उल्लेख करते हुए आडवाणी ने लिखा कि भारतीय संसद ने एंटनी को झुकने पर मजबूर कर देश भर के पाकिस्तान विरोधी भावना की अगुवाई की है।
दिल्ली प्रदेश भाजपा के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा कि पीएम को स्पष्ट कर देना चाहिए कि भारत अब पाकिस्तान से सीधे मुंह बात नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से किसी भी मुद्दे पर बातचीत पार्टी को गवारा नहीं है। यह नहीं हो सकता है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पर हमारे सैनिकों की हत्या किए जाने के बावजूद सरकार पाक से बातचीत को तैयार हो जाए।
पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि सरकार ने पुंछ हमला मामले में पाकिस्तान की भूमिका स्वीकार कर ली है। ऐसे में पाक के साथ वार्ता की गुंजाइश खत्म हो गई है।
वैसे भी पाकिस्तान ने मुंबई हमला मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। जनवरी 2004 में अपनी भूमि का भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल न होने देने के वादे पर भी पाकिस्तान खरा नहीं उतरा है।