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'हर हर मोदी' पर नमो ने कार्यकर्ताओं को क्या दी हिदायत?

Mon, 24 Mar 2014 01:29 PM IST
टीम डिजिटल/ दिल्ली
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'हर हर मोदी' नारे पर उठे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी विराम लगाने की कोशिशों में जुट गए हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने अपना रूख साफ करते हुए ट्विटर पर अपने समर्थकों से अपील की है कि वह 'हर हर मोदी' नारे का इस्तेमाल न करें।
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मोदी ने ट्वीट कर कहा, 'कुछ उत्साही समर्थक 'हर हर मोदी' का नारा लगा रहे हैं। मैं उनके उत्साह का सम्मान करते हुए यह आग्रह करता हूं कि वह भविष्य में इस नारे का इस्तेमाल न करें।'

इससे पहले 'हर हर मोदी' के नारे को लेकर इतना हंगामा मचा कि भाजपा को खुद सफाई देनी पड़ रही। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद इस मामले में अपनी शिकायत लेकर संघ के दरवाजे तक पहुंच गए।
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संघ तक पहुंची शिकायत

'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी' नारे को लेकर द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की।

उन्होंने इस नारे पर अपनी आपत्ति संघ प्रमुख के सामने दर्ज कराई है, जिसके तुरंत बाद भाजपा भी एक्‍शन में आ गई और साफ कर दिया कि यह नारा उनका नहीं है।

शंकराचार्य ने एक निजी न्यूज चैनल को दिए बयान में कहा कि ''ऐसे नारे भगवान की खातिर लगाए जाते हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति के नाम से हर-हर जोड़ना धर्म का अनादर है। इसीलिए हमने इसके खिलाफ अपनी आपत्ति संघ प्रमुख के सामने जताई है।''

शंकराचार्य की नाराजगी

शंकराचार्य ने कि 'हर-हर', गंगे मां व भगवान महादेव के साथ लगाया जाता है। इसे किसी व्यक्ति विशेष से जोड़ना, लोगों की धार्मिक आस्था को आहत करना है।

स्वरूपानंद सरस्‍वती के बयान के बाद भाजपा ने इस पर सफाई दी है। बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने बयान के तुरंत बाद ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'हर-हर मोदी' हमारा नारा नहीं है। हमारा नारा है 'अब की बार, मोदी सरकार'

शंकराचार्य के आपत्ति जताने के बाद और संघ तक इस बात के पहुंचने के बाद भाजपा ने इस नारे पर अपनी सफाई दी है। लेकिन इससे कुछ दिन पहले इसी नारे को भाजपा और विपक्ष, दोनों बुनाने पर लगे हुए थे।

महादेव की जगह मोदी

वाराणसी के ही कांग्रेसी नेता अजय राय ने इस नारे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा ने चालाकी के साथ एक धार्मिक नारे में मोदी का नाम जोड़ कर प्रचार कर रही है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा की इस चालाकी को लोगों के सामने ले जाएंगे ताकि लोगों को इसकी सच्चाई पता लग सके।

वहीं, जदयू के नेता शरद यादव ने शनिवार को इस नारे पर कटाक्ष किया और कहा, ''भाजपा हर-हर मोदी का नारा लगा रही है। भगवान शिव का पूजनीय शहर वाराणसी शहर मोदी को उनकी असली जगह बता देगा।''

आप पार्टी के नेता संजय सिंह ने इस पर कहा था, ''मोदी अब खुद को भगवान शिव से भी बड़ा समझने लगे हैं, इसीलिए भाजपा समर्थकों ने 'हर-हर महादेव' की जगह 'हर-हर मोदी' का नारा लगाना शुरू कर दिया है।

हालांकि आज भाजपा इस नारे पर सफाई देती फिर रही है, लेकिन कुछ दिन पहले भाजपा नेता मेनका गांधी इसे बढ़ावा देती हुई नजर आईं। जब मेनका को पूछा गया कि, क्या वो चुनाव प्रचार के दौरान 'हर-हर मोदी' वाले नारे का प्रयोग करेंगी, तो उन्होंने हंसते हुए कहा था कि पीलीभीत में 'हर-हर मेनका, घर-घर मेनका' नारा चलेगा।

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किसने लिखा यह नारा?

खबर के मुताबिक यह विवादित नारा वास्तविक रूप से 'हर हर महादेव, घर-घर महादेव' है जिसमें बड़ी ही चालाकी से महादेव यानी काशी के बाबा विश्वनाथ की जगह मोदी का नाम जोड़ दिया गया है।

खबर के अनुसार, बनारस हिंदू विश्विवद्यालय के प्रोफेसर कृष्ण मोहन ने यह नारा लिखा है। उनके अनुसार इस नारे का मतलब हर जगह मोदी की उपस्थित दर्ज कराना है। नारे के लेखक मोहन का कहना है इस नारे का उद्देश्य मोदी के प्रचार को विस्फोटक रूप देना है जो जल्दी से जल्दी लोगों के जहन में उतर जाए।

वहीं दूसरी ओर वाराणसी के विद्वान रमेशचंद्र पंडा का कहना है कि सबसे पहले 'हर हर महादेव, घर-घर महादेव' का नारा काशी नरेश ने भगवान शिव को खुश करने के लिए लगाया था। उनके अनुसार तब से अब तक भोले को खुश करने के लिए उनके भक्त इस नारे का प्रयोग करते हैं।
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