बिहार विधानसभा चुनाव में कमल खिलाने के लिए भाजपा जीतन राम मांझी को अपना खेवनहार बनाने की रणनीति को अंजाम देने में जुट गई है। जनता परिवार के रूप में नीतीश-लालू की साझा ताकत को रोकने के लिए भगवा रणनीतिकारों ने मांझी से अलग राजनीतिक पार्टी बनवा कर नीतीश के महादलित वोट बैंक में सेंधमारी की रणनीति तैयार की है।
मांझी ने भी महादलितों को अपने साथ खींचने के प्रयास में नए सिरे से आरक्षण का दांव खेला है। बताया जा रहा है कि बिहार की जंग में उतरने जा रही भाजपा को सबसे बड़ा भय नीतीश के साथ खड़े 22 प्रतिशत एकमुश्त महादलितों के वोट का था।
पार्टी ने मांझी को अपना खेवैया बनाने का निर्णय तो लिया है लेकिन उनसे दूरी भी बनाए रखना चाहती है ताकि मांझी से नाराज सवर्ण मतदाता उससे दूर न जाए। इसलिए भाजपा रणनीतिकारों ने मांझी को नया दल बनाने का सूत्र दिया है।