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भाजपा-संघ के रिश्ते की नई पटकथा लिखेंगे भागवत

Tue, 18 Jun 2013 12:43 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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संघ प्रमुख मोहन भागवत दिल्ली पहुंच चुके हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के बाद भाजपा में फूट और एनडीए में हुई टूट के बाद उनके पहले दिल्ली प्रवास को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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खासतौर से अगले दो दिन दिल्ली में ही रहने की दौरान भागवत की नाराज चल रहे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी महत्वपूर्ण मुलाकात होनी है।

माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान संघ और भाजपा के रिश्ते की नई पटकथा तैयार किए जाने पर व्यापक विचार विमर्श होगा।

संघ सूत्रों की माने तो इस मुलाकात के कुछ दिनों बाद भाजपा और संघ दोनों में ही संगठन स्तर पर व्यापक संतुलन बनाने की दिशा में ठोस पहल होगी।

संघ की ओर से भाजपा में भेजे जाने वाले कई चेहरों में परिवर्तन हो सकता है।

खासतौर पर अगले कुछ दिनों में यह साफ संकेत दिया जाएगा कि आडवाणी अभी भी अलग-थलग नहीं पड़े  हैं।

दरअसल मोदी की ताजपोशी के तरीके से नाराज हो कर इस्तीफा देने वाले आडवाणी को भागवत ने ही मनाया था।

इस दौरान फोन पर हुई बातचीत के दौरान आडवाणी ने संघ की ओर से भाजपा की जिम्मेदारी संभाल रहे सुरेश सोनी और संगठन महासचिव रामलाल के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए थे।

तब भागवत ने इस बारे में मिल बैठ कर बातचीत करने का आश्वासन दिया था।

माना जा रहा है कि भागवत खासतौर पर इसी मसले पर दिल्ली आए हैं। अगले दो दिनों में उनकी आडवाणी से विस्तार से बातचीत होगी और इस दौरान पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी भी उपस्थित रहेंगे।
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बैठक में जो भी रूपरेखा तैयार होगी, उस पर अमरावती में अगले महीने होने वाली संघ की कार्यसमिति की बैठक में अंतिम मुहर लगा दी जाएगी।

संघ सूत्रों के मुताबिक सुरेश सोनी और रामलाल के बारे में शिकायत अकेले आडवाणी की नहीं है। संघ के कई वरिष्ठ नेता भी इनसे खासे नाराज हैं।

इन्हें लगता है कि गडकरी की दोबारा ताजपोशी रोकने में सोनी ने अहम भूमिका निभाई थी। अब आडवाणी की शिकायत ने संघ की राह आसान कर दी है।

संघ के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक फिलहाल पार्टी संगठन और संघ और भाजपा के बीच संतुलन बनाने पर विचार हो रहा है। आडवाणी से मुलाकात में भागवत संतुलन बनाने के तरीके पर विचार विमर्श करेंगे।

इसके तहत सुरेश सोनी की जगह संघ की ओर से भाजपा का प्रभार भैयाजी जोशी या अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह डॉ कृष्णगोपाल को दी जा सकती है। इसके अलावा कई राज्यों के संगठन मंत्रियों को वापस संघ भेजा जा सकता है।
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