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‘कैश फॉर सब्सिडी’ पर चुनाव आयोग पहुंची भाजपा

Fri, 30 Nov 2012 11:29 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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यूपीए सरकार की आम आदमी के लिए  घोषित ‘कैश फॉर सब्सिडी’ योजना सियासी विरोध में उलझती जा रही है। गुजरात चुनाव के दौरान इस योजना का ऐलान करने से खफा भाजपा चुनाव आयोग के दरबार में पहुंच गई है। पार्टी का आरोप है कि सीधे खाते में सब्सिडी देने का ऐलान कर यूपीए सरकार व कांग्रेस ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। माकपा भी इस योजना पर उंगली उठा चुकी है।
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भाजपा ने इस योजना से संबंधित घोषणा को तुरंत वापस लेने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव के दौरान इसका ऐलान कर सरकार व कांग्रेस ने गुजरात के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसमें चुनाव आयोग से उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है। भाजपा ने कहा है कि सरकार को हिमाचल प्रदेश व गुजरात चुनाव प्रक्रिया खत्म पूरी हो जाने के बाद ही इसका ऐलान करना चाहिए था।

मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के बाद आडवाणी ने कहा कि आयोग ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की आपत्ति इस योजना को लेकर नहीं, बल्कि इसके ऐलान के समय को लेकर है। आयोग को सौंपे ज्ञापन में भाजपा ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने फैसला किया है कि अगले साल एक जनवरी से 18 राज्यों के 51 जिलों में ‘कैश फॉर सब्सिडी’ योजना शुरू कर दी जाएगी। सरकार का यह फैसला गुजरात चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है।
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इस योजना से बेचैन भाजपा इसकी समीक्षा के लिए पार्टी के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की दो सदस्यीय समिति गठित कर चुकी है। मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने पहुंची पार्टी की टीम में लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली व पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी आदि शामिल थे।

केंद्र नहीं मानता चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन
सरकार ने कैश सब्सिडी योजना को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन मानने से इनकार कर दिया है। भाजपा की ओर से चुनाव आयोग से शिकायत को नजरअंदाज करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निर्देश पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने तमाम मंत्रालयों से इस पर तत्काल अमल करने को कहा है। इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए सरकार ने कहा है कि इस योजना की घोषणा मार्च में बजट भाषण के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कर दी थी। इसके बाद 28 सितंबर को पीएमओ से जारी बयान में इसकी घोषणा की गई। इसलिए कैश सब्सिडी योजना की शुरुआत चुनाव संहिता का उल्लंघन नहीं है।

नई योजना को परवान चढ़ाने के लिए सरकार की मुश्दैती का आलम यह है कि 26 नवंबर को कैबिनेट मंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक के चार दिन बाद शुक्रवार को पीएम के प्रधान सचिव पुलक चटर्जी ने नौ मंत्रालयों के सचिवों को पत्र लिखकर विभाग की चिन्हित योजनाओं में सीधे नकद हस्तांतरण के लिए मुस्तैदी दिखाने को कह दिया। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों का जोर इस बात पर होना चाहिए कि बिना किसी बाधा के पहले 51 जिलों में और उसके बाद निर्धारित योजना के  मुताबिक कार्यक्रम शुरू किया जाए।

पत्र में कहा गया है कि प्रत्येक लाभार्थी के नाम व पते का डिजिटलाइजेशन होना जरूरी है। इस संबंध में राज्य और जिला स्तर पर ध्यान देना जरूरी है। चटर्जी ने प्रत्येक मंत्रालय की कार्यान्वयन समितियों को डिजिटलाइजेशन का काम पूरा करने के लिए हर हफ्ते बैठक करने का निर्देश दिया है। पत्र में सचिवों से कहा गया है कि उन्हें यूआईडी प्राधिकरण और सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग से हर जरूरी सहायता मिलेगी। बैंकिंग सुविधा और वित्तीय व लेखा प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का समाधान वित्तीय समावेश और प्रौद्योगिकी समिति करेगी।
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