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नीतीश को कांग्रेस के पाले में जाने से रोकने में जुटी भाजपा

Sun, 03 Nov 2013 12:03 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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पटना की हुंकार रैली के बाद भाजपा के निशाने खास तौर पर आए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पार्टी हर हालत में कांग्रेस के पाले में जाने से रोकने की कोशिश में जुटी है।
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पार्टी का मानना है कि कांग्रेस, जदयू और लोजपा के एक साथ आने से लोकसभा चुनाव में बिहार की सियासी जंग जीतना मुश्किल हो जाएगा।

इसलिए नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के लगभग सभी नेता लगातार राम मनोहर लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम का उल्लेख कर नीतीश को उनके कांग्रेस विरोध के इतिहास की याद दिलाने में जुटे हैं।

पटना की हुंकार रैली से लेकर सभी कार्यक्रमों में भाजपा सबसे ज्यादा जोर इसी बात पर दे रही है कि किस तरह नीतीश कुमार जीवनभर कांग्रेस विरोध की राजनीति करने के बाद अब उसी के पाले में जा रहे हैं।
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दरअसल, भाजपा को इस बात का भय है कि यदि कांग्रेस और जदयू एक साथ आ जाते हैं तो रामविलास पासवान की लोजपा भी उनके साथ आ जाएगी। ऐसे में बिहार में भाजपा को हराने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय इसी गठबंधन को एकमुश्त वोट दे सकता है। इससे भाजपा का खेल खराब हो जाएगा।

इसलिए पार्टी की कोशिश है कि नीतीश का कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन न हो पाए। तीसरे मोर्चे की ओर नीतीश के बढ़ते कदमों से भाजपा राहत में है, लेकिन पार्टी को अब भी आशंका है कि मुस्लिम वोट के लिए भाजपा से 17 साल की दोस्ती खत्म कर देने वाले नीतीश कुमार अब भी कांग्रेस से चुनावी दोस्ती की सोच रहे हैं।

इसलिए भाजपा नेताओं ने नीतीश पर हमले तेज कर दिये हैं और उन्हें लोहिया की पीठ में छुरा घोंपने वाला तक बताने में जुट हैं। वैसे कांग्रेस, जदयू और लोजपा के एक साथ आने की संभावना देखकर ही भाजपा ने यादवों पर डोरे डालने शुरू कर दिये हैं।
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आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के जेल चले जाने के बाद भाजपा की कोशिश है कि जहां आरजेडी उम्मीदवार कमजोर हों वहां यादव वोट भाजपा के पाले में आ जाएं।

मोदी ने इसी रणनीति के तहत हुंकार रैली में भगवान श्रीकृष्ण और द्वारका का उदाहरण देकर कहा था कि यादवों के साथ गुजरात का पुराना संबंध रहा है।
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