जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार को बनाने की कवायद तेज हो गयी है। लेकिन ये पिछले साल के घटनाक्रम को दोहराने जैसी लग रही है।
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद दो महीने के मंथन के बाद पिछले साल मार्च में मुफ्ती मोहम्मद की सरकार ने शपथ ग्रहण किया था। अब मुफ्ती के निधन के बाद भी इस साल मार्च में ही नई सरकार के गठन के प्रयास तेज हैं। पिछली बार गठबंधन एजेंडा तय करने के नाम पर देर हुई और इस बार उसी एजेंडे पर नए सिरे से प्रतिबद्धता जताने की कवायद चल रही है।
मुफ्ती के निधन के बाद उनकी पुत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के सामने दोहरी चुनौती है। भाजपा के साथ गठबंधन के बाद नाराज वोट बैंक को संतुष्ट करने के अलावा पार्टी के अंदर उठ रहे विरोध के स्वर को शांत करना उनके लिए सियासी विवशता बन गई है।
लिहाजा मुफ्ती के अंदाज में उन्होंने भी जल्दीबाजी नहीं दिखाई। अब मुफ्ती का चालीसवां बीत चुका है और पार्टी भी भाजपा के साथ सरकार बनाने के मुद्दे पर लगभग एकजुट होती दिख रही है।