महाराष्ट्र में सीटों के बंटवारे पर शिवसेना के साथ चरम पर पहुंचे विवाद के बीच भाजपा ने रविवार को अपनी सर्वाधिक ताकतवर इकाई संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई है। बैठक में न केवल महाराष्ट्र में गठबंधन जारी रखने पर अंतिम फैसला होगा, बल्कि बोर्ड अकेले दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति की भी समीक्षा करेगा।
हालांकि पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाए जाने को शिवसेना पर दबाव बनाए जाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। उपचुनाव में कई राज्यों में कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा अपनी सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना से अलग रास्ता अख्तियार करने की स्थिति में नहीं है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन के दमदार प्रदर्शन के बाद शिवसेना भाजपा को महाराष्ट्र में पहले की तुलना में ज्यादा सीटें देने के लिए तैयार नहीं है।
दरअसल भाजपा और शिवसेना दोनों को पता है कि विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने वाले दल को ही मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिलेगा। ऐसे में दोनों ही दल ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ कर मुख्यमंत्री का पद अपने पक्ष में सुरक्षित रखना चाहते हैं।