खाद्य सुरक्षा विधेयक को कानूनी जामा पहनाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने विशेष सत्र बुलाए जाने का विरोध न करने का फैसला किया है।
हालांकि पार्टी का सुझाव है कि सरकार को विशेष सत्र बुलाने के बदले आमतौर पर जुलाई महीने में होने वाले मानसून सत्र का इंतजार करना चाहिए। वाम दलों को विशेष सत्र पर नहीं बल्कि विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति है।
मालूम हो कि यूपीए सरकार चुनावी बेला में अपने इस गेमचेंजर विधेयक को जल्द से जल्द कानूनी जामा पहना देना चाहती है।
सरकार की विशेष सत्र की तैयारी के संबंध में लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने ट्विटर के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्वीट किया कि भाजपा को विशेष सत्र बुलाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
खाद्य सुरक्षा विधेयक के लिए अधिसूचना जारी करने की कोई जरूरत नहीं है। पार्टी विशेष सत्र का विरोध नहीं करेगी। हालांकि अच्छा होता कि सरकार विशेष सत्र बुलाने के बदले जुलाई महीने में होने वाले मानसून सत्र का इंतजार करती।
उल्लेखनीय है कि सरकार बीते बजट सत्र के दूसरे हिस्से में तमाम कोशिशों के बावजूद इस विधेयक को कानूनी जामा नहीं पहना सकी थी। विपक्ष खासतौर पर भाजपा ने भ्रष्टाचार के मामले में दो केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की मांग अनसुनी किए जाने पर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी थी।
बीते शनिवार को हुई कांग्रेस कोरग्रुप की बैठक में खाद्य सुरक्षा विधेयक को जल्द से जल्द संसद में पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने का फैसला हुआ।
माना जा रहा है सरकार आगामी शनिवार को इस मसले पर सर्वदलीय बैठक बुलाएगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर विशेष सत्र में बात नहीं बनी तो वह अध्यादेश का भी सहारा ले सकती है।