हरियाणा में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भाजपा अपने पुराने सहयोगी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से हाथ मिलाने की तैयारी में है।
नई रणनीति के तहत भाजपा वर्तमान सहयोगी हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के अध्यक्ष कुलदीप विश्नोई के सामने विलय या हिसार संसदीय सीट तक सीमित रहने का विकल्प रखेगी।
राज्य में नया राजनीतिक समीकरण तय करने का जिम्मा पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के करीबी अरुण जेटली संभाल रहे हैं।
जेटली की इस संबंध में इनेलो नेता अभय चौटाला के साथ दो बार गंभीर बातचीत हो चुकी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों ही दल राज्य की राजनीति में फिर से एक साथ आगे बढ़ने पर सहमत हैं।
भाजपा को लगता है कि वर्तमान परिस्थितियों में मुश्किलों में घिरी इनेलो से अपनी शर्तों पर गठबंधन किया जा सकता है।
दरअसल भाजपा ने बीते दिनों हरियाणा में हजकां से गठबंधन कर तो लिया था, मगर इसे जारी रखने पर पार्टी के केंद्रीय नेताओं में शुरू से ही ऊहापोह की स्थिति थी।
अकाली दल के मुखिया और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भाजपा पर लगातार इनेलो से गठबंधन करने पर जोर डालते रहे।
दोनों दलों के फिर से साथ आने की चर्चा तब तेज हुई जब जेबीटी घोटाला मामले में जेल में बंद इनलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला की तबीयत खराब होने पर पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने राममनोहर लोहिया अस्पताल में मुलाकात की।
इसके बाद जब चौटाला जमानत पर छूटे तब भी दोनों दलों के साथ आने पर कई बार चर्चा हुई। अंतिम बातचीत 21 सितंबर को अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल के आवास पर हुई।
फिलहाल तय हुआ है कि हजकां को जल्द से जल्द भाजपा में विलय का प्रस्ताव भेजा जाए।
अगर विश्नोई इसके लिए तैयार नहीं होते हैं तो उनके लिए हिसार सीट छोड़ दी जाए। उक्त सूत्र का कहना था कि भाजपा ने इनलो के साथ जाने का फैसला करीब करीब तय कर लिया है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि चूंकि हजकां और भाजपा दोनों ही दल वहां मुख्य रूप से गैरजाट राजनीति करते हैं, इसलिए निर्णायक भूमिका अदा करने वाले जाट समुदाय को जोड़ने के लिए इनेलो से गठबंधन फायदे का सौदा है।
फिर चूंकि फिलहाल इनेलो संकट में है, इसलिए भी पार्टी को लगता है कि वह इस बार अपनी शर्तों पर गठबंधन कर अधिक राजनीतिक लाभ हासिल कर सकता है।