भाजपा की राष्ट्रीय चुनाव समिति के सदस्य और राज्यसभा सांसद अनिल दवे ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को दूल्हा मानते हुए कहा है कि बारात में चलने वालों और दूल्हे का कोई संघर्ष नहीं होना चाहिए। अब दूल्हा बनने का उसका वक्त आया है। दूल्हा भी हमारा भाई है। उससे ईर्ष्या करना ठीक नहीं।
उन्होंने कहा कि जो लोग पहले घोड़ी चढ़ चुके हैं, वे यह नाराजगी जाहिर नहीं कर सकते कि उन्हें घोड़ी पर क्यों नहीं बैठने दिया जा रहा। अब उन्हें आनंद से घोड़ी के आगे नाचना चाहिए या दूल्हे के पीछे चलना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख कार्यकर्ता और मध्य प्रदेश में प्रचार की कमान संभाल रहे अनिल माधव दवे भाजपा के उन नेताओं में से हैं जो बड़ी बेबाकी से बात करते हैं।
'भारत को मिला हीरो नरेंद्र मोदी'
दवे नहीं मानते कि पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी का कोई संघर्ष पार्टी में है। दवे के मुताबिक, ‘नरेंद्र मोदी के बारे में एक राय बनी है कि इस व्यक्ति में विजन है। इसके पास देश के विकास का ब्लू प्रिंट है। यह कुछ बदलाव ला सकता है। इसलिए उस खाके पर मिलकर काम करें। यह सबका दायित्व बनता है।’
पार्टी पर एक व्यक्ति के भारी होते जाने के मुद्दे पर दवे की राय है कि भारत हमेशा से मूर्तिपूजक रहा है और अपने हीरो की तलाश करता रहा है। ‘हर कालखंड के अपने हीरो हुए हैं। इस समय भी देश एक योद्धा की तलाश कर रहा था। उसे वह हीरो नरेंद्र मोदी में मिल गया। और फिर पिरामिड के शीर्ष पर तो एक ही व्यक्ति बैठता है। सब तो नहीं बैठ सकते। वह व्यक्ति नरेंद्र मोदी है तो उसमें समस्या क्या है।‘
मध्य प्रदेश में क्या मोदी का प्रचार फीका है? सवाल पर अनिल दवे सोचते हैं कि कई लोग सोचते हैं कि ओवरडोजिंग हो रही है। वैसे नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में चंबल, बालाघाट, मंडला, निमाड़ जैसे तमाम इलाके घूमे हैं। अब सतना, सीधी और रीवा भी वह आने वाले हैं। प्रधानमंत्री पद का कौन सा उम्मीदवार इतनी लोकसभा सीटों पर गया है।
'देश में है मोदी की लहर'
मोदी की लहर के मुद्दे पर दवे का कहना है कि वर्टिकली (ऊर्ध्वाधर) और होरिजंटली (क्षैतिज) किसी भी तरह देख लो, हर व्यक्ति नरेंद्र मोदी के बारे में सोच रहा है। उद्योगपति हो या गरीब तबका, हर किसी को लगता है कि नरेंद्र मोदी देश को बदल सकते हैं, विकास के रास्ते पर ला सकते हैं। यह तो लहर ही है। अब तक लोग कसमसा रहे थे। देश को आवाज मिल गई है।
भाजपा और संघ के नेताओं में टकराव के मुद्दे पर अनिल दवे का कहना है कि जनसंघ हो या राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हो या भाजपा, उनका बुनियादी मैटल एक ही है। जैसे सोने के अलग-अलग गहने। उन्हें आपस में मिलाना मुश्किल नहीं है। भाजपा अब एक राष्ट्रवादी पार्टी है। और संघ क्या है? देश के लिए जियो, देश के लिए काम करो और जरूरत पड़े तो देश के लिए मर जाओ। यही संघ है।
भाजपा को भी इसी रास्ते पर चलना चाहिए। दवे के अनुसार, ‘भाजपा में ऐसा हो सकता है कि लक्ष्य से कुछ भटकाव हो। उसका निदान यह है कि मूल सिद्धांतों (फंडामेंटल्स) पर लौट आओ।’ उनका मतलब है कि भाजपा जब भी लक्ष्य से भटकती है तो वह संघ की ओर लौटती है और संघ उसे ठीक कर देता है।