कर्नाटक की करारी हार के गम में डूबी भाजपा को कोलगेट मामले में यूपीए सरकार को मिली सुप्रीम कोर्ट की फटकार ने कुछ राहत देने का काम किया है। यह फटकार भाजपा के लिए मरहम का काम कर गई।
सरकार की खिंचाई से उत्साहित भाजपा ने कानून मंत्री को बर्खास्त करने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग फिर बुलंद कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा, ‘अब कानून मंत्री के पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।’ भाजपा ने रेलमंत्री पवन बंसल को भी मंत्रिमंडल से बाहर करने की मांग दोहराई है।
कर्नाटक चुनाव के नतीजों ने भाजपा को बेहद निराश कर दिया है, क्योंकि भ्रष्टाचार व घोटालों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन करने के बाद भी भाजपा से कांग्रेस लगातार राज्यों को छीनती जा रही है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक ताजा उदाहरण है। इस दौरान सिर्फ गुजरात और गोवा में ही भाजपा को सफलता मिली।
कर्नाटक की हार पर भाजपा की दलील है कि संगठन में टूट होने के बाद से ही पार्टी मानने लगी थी कि चुनाव नतीजे विपरीत रहेंगे। भाजपा ने कर्नाटक की हार को स्वीकारते हुए कहा कि वहां कुछ कमियां रही होंगी।
पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने कांग्रेस की कर्नाटक की जीत पर कोयले की कालिख पोत दी है। ये चुनाव भाजपा के लिए सबक हैं तो कांग्रेस के लिए संदेश।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक चुनाव को अंतिम मान रही कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि अभी आगे भी चुनाव आ रहे हैं और तब भी चुनावी मुद्दे भ्रष्टाचार और घोटाले ही रहेंगे। इसलिए कांग्रेस को जान लेना चाहिए कि सितारों से भी आगे दुनिया है।