नरेंद्र मोदी के सवाल पर एनडीए के कुनबे का बिखरना तय हो गया है। जद-यू रविवार को विधायकों की बैठक के बाद एनडीए से किनारा करने की घोषणा कर देगा।
मनाने की सारी कोशिशें नाकाम होने के बाद भाजपा ने भी गठबंधन बचाने से हाथ खड़ा कर दिया है। बिहार में भाजपा कोटे के मंत्रियों ने अपने दफ्तरों और अपनी सरकारी गाड़ियों से किनारा कर लिया है।
शनिवार को भाजपा और जद-यू की तल्खी और बढ़ गई। जद-यू महासचिव शिवानंद तिवारी ने कहा कि अब इस गठबंधन में कुछ नहीं रह गया है। पार्टी को 2010 में ही भाजपा से नाता तोड़ लेना चाहिए था।
इस पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य सरकार के मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर जद-यू को मोदी से इतनी ही तकलीफ है तो उसने गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगे के दौरान ही नाता क्यों नहीं तोड़ा।
इससे पहले नाता टूटने का स्पष्ट संकेत देते हुए राज्य सरकार में भाजपा कोटे के सभी 17 मंत्रियों ने दफ्तर और सरकारी कार का इस्तेमाल बंद कर दिया।
उधर, जद-यू अध्यक्ष शरद यादव ने भाजपा पर राजग के तय एजेंडे से बाहर आने का आरोप लगाया है।
जद-यू सूत्रों का कहना था कि भाजपा से अलग होने का फैसला बहुत पहले ही हो चुका है। शनिवार की बैठक में एनडीए में बने रहने पर नहीं, बल्कि इस बात पर चर्चा हुई कि भाजपा से नाता तोड़ने के बाद आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जाए।
दरअसल, राज्य की 243 सदस्यीय विधानसभा में जद-यू के 118 सदस्य हैं। बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए पार्टी ने राज्य के छह निर्दलीय विधायकों में से पांच को मना लिया है।
अब रविवार को विधायकों की बैठक में भाजपा से नाता तोड़ने के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से सभी को अवगत करा दिया जाएगा। इसके बाद रविवार को ही जद-यू की ओर से एनडीए से संबंध तोड़ने का ऐलान हो जाएगा।