प्रियंका वाड्रा का नाम स्टार प्रचारक के तौर पर उछलने व फिर दब जाने के बावजूद भाजपा का मानना है कि कांग्रेस इस रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
पार्टी का मानना है कि एक दशक से सक्रिय राजनीति में रहने के बावजूद राहुल गांधी खास असर छोड़ने में सफल नहीं रहे हैं। इसलिए अब चौतरफा घिरी कांग्रेस लोकसभा की सियासी जंग में स्टार प्रचारक के तौर पर प्रियंका को मैदान में जरूर उतारेगी।
हालांकि भाजपा का मानना है कि प्रियंका के मैदान में आने पर भी नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर भारी पड़ेंगे।
इसके बावजूद भाजपा ने कांग्रेस की इस रणनीति की सियासी काट तलाशनी शुरू कर दी है। पार्टी मान रही है कि लोकसभा की सियासी जंग में कांग्रेस के पास अब प्रियंका ही ब्रह्मास्त्र के तौर पर बची हैं और इस अस्त्र का कांग्रेस जरूर उपयोग करेगी।
प्रियंका के रायबरेली से चुनाव लड़ने अथवा स्टार प्रचारक के तौर पर सामने आने से मौजूदा राजनीतिक माहौल से निराश कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा हो जाएगा। कांग्रेस की रणनीति भी यही है।
हालांकि भाजपा इस बात से आश्वस्त है कि राहुल के मैदान में होने की हालत में कांग्रेस प्रियंका को पीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनाएगी। इसलिए नरेंद्र मोदी से प्रियंका का सीधा मुकाबला नहीं होगा।
प्रियंका कांग्रेस के लिए 'तिनके का सहारा'
भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी कहते हैं कि प्रधानमंत्री भले ही मनमोहन सिंह हों, लेकिन असली पावर कांग्रेस के प्रथम परिवार के पास रही है। इसमें सोनिया गांधी व राहुल गांधी के अलावा प्रियंका भी शामिल हैं। कांग्रेस के लिए प्रियंका डूबते को तिनके का सहारा जैसी हैं, लेकिन अब यह ‘तिनका’ भी काम नहीं करेगा।
दरअसल, भाजपा का मानना है कि कांग्रेस ने सोची समझी रणनीति के तहत प्रियंका का नाम उछाला है। यदि कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रियंका को आगे लाने की मांग करते हैं तो कांग्रेस उन्हें स्टार प्रचारक के तौर पर मैदान में उतारेगी।
पार्टी सांसद प्रकाश जावडे़कर कहते हैं कि कांग्रेस राहुल की सियासी विफलता पर किसी भी नेता को आगे करे, भाजपा को इससे कोई लेना देना नहीं है। यह बात कांग्रेस के नेताओं ने ही उछाली है। यह कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई का नतीजा है।