आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटी भाजपा ने इलाहाबाद में आयोजित महाकुंभ को लगभग हाईजैक कर लिया है। महाकुंभ में भाजपा नेताओं के जमावड़े और विहिप समर्थक संतों की बैठक ने कांग्रेस की बैचेनी बढ़ा दी है। यही वजह है कि कुंभ में बिछी राजनीतिक बिसात पर कांग्रेस ने भी दांव चलने की तैयारी शुरू कर दी है।
माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंभ यात्रा के बाद कांग्रेस भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के कार्यक्रमों की घोषणा कर सकती है। वहीं, कांग्रेस नेता उन तमाम संतों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर भाजपा का टैग नहीं लगा है।
कुंभ में विहिप और बाबा रामदेव ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बाबा राम देव ने मंगलवार को साफ कर दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव में उन्होंने तीन सौ सांसदों को जिताने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि रामनवमी के बाद वे कांग्रेस का सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए देश भर में अभियान चलाएंगे। इन चुनौतियों के मद्देनजर कांग्रेस ने सरकार समर्थक संतों की खोजबीन शुरू कर दी है।
कुंभ में आठ फरवरी को कांग्रेस सांसद सतपाल जी महाराज पहुंच रहे हैं। साथ में उनकी पत्नी माता अमृता रावत भी आ रही हैं। कुंभ-2001 में सोनिया गांधी सतपाल जी महाराज के शिविर में भी गई थीं। पार्टी सूत्रों ने बताया है कि सोनिया गांधी सात, नौ या 12 फरवरी को कुंभ में जा सकती हैं। इस दौरान राहुल गांधी के आने का कार्यक्रम भी बन रहा है।
12 फरवरी को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के जाने का कार्यक्रम है। विजय बहुगुणा जयराम आश्रम जा सकते हैं। साथ ही चिदानंद मुनि एवं शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से भी मुलाकात कर सकते हैं।
वहीं सोनिया गांधी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती से मुलाकात कर सकती हैं और सतपाल जी महाराज के शिविर में भी जा सकती हैं। कांग्रेस की तैयारियों से इतना तो स्पष्ट है कि कुंभ में भाजपा की मौजूदगी ने उसकी बैचेनी बढ़ा दी है और उसने भी इसका 'काट' ढूंढ़ने की कोशिश शुरू कर दी है।