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देश भर में नमो लहर, एनडीए 300 के पार

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देश के मतदाताओं ने 1984 के बाद पहली बार किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिया। 16 वीं लोकसभा चुनावों में भाजपा ने बढ़त और जीत समेत अब तक 277 सीटों पाने में कामयाब रही।
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10 सालों से सत्ता पर काबिज कांग्रेस धराशायी हो गई। बढ़त और जीत समेत कांग्रेस के खाते में मात्र 47 सीटें ही आई। तीसरे मोर्चे की खिचड़ी चुल्हे पर भी नहीं चढ़ पाई। अम्मा, दीदी और नवीन बाबू को छोड़ तीसरे मोर्चे के सभी दल नरेंद्र मोदी की आंधी में उजड़ गए।

एग्जिट पोल के अनुमान पहली बार तकरीबन ठीक साबित हुए हैं। नरेंद्र मोदी का देश के अगले प्रधानमंत्री पद के रूप में शपथ लेना तय हो गया है।

भाजपा की अपने बूते पर बहुमत के पार

चुनाव रैलियों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह का दावा था कि राजग को 300 से अधिक सीटें मिलेंगी। आज जैसे-जैसे ईवीएम के वोटों की गिनती हुई, ये दावा सही साबित होता गया। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने शुरुआती रूझानों में ही यूपीए को पीछे छोड़ दिया।

शुरूआती 100 सीटों के रुझान में राजग 52 सीटों पर आगे था। 200 सीटों के रुझान में ये आंकड़ा 122 सीटों तक पहुंच गया। सभी 543 सीटों का रूझान आने के बाद ये आंकड़ा 337 सीटों के करीब पहुंच गया।

जिसमें भाजपा की अपने बूते पर 283 सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रही।

कांग्रेस अब तक की सबसे बुरी हार की ओर

रुझान और अंतिम नतीजों की मानें तो कांग्रेस अपनी सबसे बुरी हार की ओर बढ़ रही है। बढ़त और जीत समेत कांग्रेस के खाते में महज 47 सीटें ही आई हैं। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कांग्रेस की ये सबसे बड़ी हार।

1977 में आपातकाल के खिलाफ जब देश में कांग्रेस विरोधी लहर अपने चरम पर थी, तब भी उन्हें 183 सीटें हास‌िल हुईं थीं।‌

पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 206 सीटें जीतीं थीं।
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यूपीए सरकार के सभी मंत्री हारे

इन चुनावों में देश के मतदाताओं ने यूपीए सरकार को पूरी तरह नकार दिया है। यूपीए के अधिकांश केंद्रीय मंत्री चुनाव हार गए। राहुल गांधी के युवा तुर्कों की टीम भी जमींदोंज हो गई है।

सुशील कुमार शिंदे, सलमान खुर्शीद्र, पवन कुमार बंसल, सीपी जोशी, कपिल सिब्बल, सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा चुनाव हार गए हैं। श्री प्रकाश जायसवाल अपनी-अपनी सीटों पर पीछे चल रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री शशि ‌थरूर जरूर अपने सीट से आगे चल रहे हैं।
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