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भाजपा में घमासान बढ़ा, गांधीनगर से टिकट दिए जाने पर फिर रूठे 'लाल'

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भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी बनारस के अलावा गुजरात के वडोदरा से भी चुनाव लड़ेंगे। इस बीच पार्टी के पितामह लालकृष्ण आडवाणी अब उनकी इच्छा के मुताबिक भोपाल से टिकट नहीं दिए जाने को लेकर रूठ गए हैं।
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पांच बार गांधीनगर से लोकसभा सांसद रहे आडवाणी को पार्टी ने इस बार भी वहीं से उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवारी के इस फैसले से आडवाणी और मोदी के संबंधों में आई दरार और गहरी हो गई है।

देर रात तक आडवाणी को गांधीनगर से चुनाव लड़ने पर राजी करने की कोशिशें जारी थीं। लेकिन आडवाणी ने पार्टी नेतृत्व से अपनी नाखुशी साफ जता दी है।

आडवाणी से मिले सुषमा-गडकरी

पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद बुधवार रात 67 प्रत्याशियों की छठी सूची जारी कर दी गई। इसमें पार्टी ने आडवाणी के गांधीनगर से और मोदी के वडोदरा से चुनाव लड़ने की घोषणा की।

इस ऐलान के बाद देर रात नितिन गडकरी और सुषमा स्वराज आडवाणी को गांधीनगर सीट से लड़ने के लिए मनाने पहुंचे, लेकिन उन्होंने पार्टी के फैसले पर अपनी नाखुशी साफ जाहिर कर दी।

45 मिनट की मुलाकात में आडवाणी ने दोनों नेताओं को बताया कि वह भोपाल से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के फैसले पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि गुजरात भाजपा इकाई की उन्हें गांधीनगर से उतारने की सिफारिश तो मान ली गई, लेकिन मध्य प्रदेश भाजपा की उन्हें भोपाल से उतारने की सिफारिश पर विचार तक क्यों नहीं किया गया।

राजनाथ से मिले सुषमा-गडकरी

सूत्रों के मुताबिक आडवाणी से मुलाकात के बाद सुषमा और गडकरी ने राजनाथ से मिलकर उन्हें आडवाणी के रुख से अवगत कराया। इस दौरान संघ के नेता सुरेश सोनी भी वहां मौजूद थे।

गौरतलब है कि मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले के वक्त से ही आडवाणी नाखुश चल रहे हैं। भोपाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जताने वाले आडवाणी को गांधीनगर से उतारने का फैसला बुधवार को पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में हुआ।

केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगा दी गई, लेकिन आडवाणी इन दोनों बैठकों में ही शामिल नहीं थे। आडवाणी ने पहले ही पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से कह दिया था कि वह इस बार भोपाल से लड़ना चाहते हैं। वह मान रहे थे कि पार्टी उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए भोपाल से ही उतारेगी।

भाजपा के छठी सूची में कई दलबदलू

उधर, भाजपा ने छठी सूची जारी करते हुए रुपहले पर्दे की ड्रीमगर्ल अभिनेत्री हेमा मालिनी को यूपी में मथुरा से चुनाव मैदान में उतार दिया है। राजस्थान के जयपुर ग्रामीण से ओलंपिक पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर से लेकर बिहार में बक्सर से मोदी समर्थक अश्विनी चौबे का नाम भी सूची में शामिल है।

टिकटों को लेकर भाजपा में जारी घमासान के बीच पार्टी की इस सूची में दलबदलुओं की भरमार है। यूपी से पाला बदलकर आए जगदंबिका पाल, बृजभूषण शरण सिंह, कीर्तिवर्द्धन सिंह से लेकर महाराष्ट्र में हिना गावित सरीखे चेहरों को उम्मीदवार बनाया गया है।

इस सूची के साथ ही भाजपा ने अब तक कुल 370 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। बहरहाल, भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने उत्तर प्रदेश की 15 सीटों के साथ ही गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र, बिहार समेत सात राज्यों के लिए प्रत्याशियों के नाम जारी कर दिए।
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भाजपा को था गलत संदेश जाने का डर

आडवाणी इस बार भोपाल से चुनाव लड़ना चाहते हैं और मध्य प्रदेश पार्टी इकाई ने इसके लिए उनके नाम का प्रस्ताव भी भेज दिया था। मगर आडवाणी के गुजरात छोड़ शिवराज सिंह चौहान के मध्य प्रदेश जाने से भाजपा को सियासी नुकसान होने की आशंका है।

भाजपा मान रही है कि आडवाणी के चुनाव लड़ने के लिए भोपाल चले जाने से देशभर में गलत संदेश जाएगा।

इसी सियासी नुकसान को भांपते हुए मोदी और राजनाथ सिंह की जोड़ी ने आडवाणी को गांधीनगर से उतारने का ऐलान कर दिया। मोदी के इस फैसले को पार्टी का निर्णय साबित करने के लिए बाकायदा इस पर भाजपा संसदीय बोर्ड की मुहर भी लगवा ली गई।
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