कांग्रेस और भाजपा ने सोमवार को चुनाव आयोग और इंटरनेट सर्च इंजन गूगल के बीच प्रस्तावित करार पर चिंता जताई है। करार में आगामी आम चुनाव में वोटरों की सुविधा सेवाओं के विस्तार देने की बात कही गई है।
अमेरिकी गूगल के आग्रह पर चुनाव आयोग ने ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन संबंधी करार प्रस्तावित किया है।
इसमें वोटर कार्ड से संबंधित अहम तथ्यों को इंटरनेट पर मुहैया कराने समेत पोलिंग बूथों की जानकारी देने की भी बात की गई है। दोनों पार्टियों का कहना है कि ऐसा फैसला लेने से पहले परामर्श लिया जाना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के लीगल सेल ने इस करार पर चिंता जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है और उम्मीद जताई है कि प्रस्तावित करार चुनावी प्रक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर नहीं डालेगा।
कांग्रेस-बीजेपी की चिंता
कांग्रेस महासचिव और लीगल सेल प्रभारी केसी मित्तल के मुताबिक, ‘यह बेहद संवेदनशील मामला लगता है। ऐसा लग रहा है कि बगैर किसी परामर्श के यह फैसला लिया गया है।’ उधर, भाजपा ने भी कांग्रेस के सुर में सुर मिलाते हुए चिंता जताई है।
पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि इस तरह के फैसले से पहले आयोग सर्वदलीय बैठक में इस पर चर्चा कर सकता था।
हालांकि हमें आयोग के इरादे पर संदेह नहीं है, फिर भी अंतिम निर्णय से पहले इस पर विचार विमर्श जरूरी था।
फैसले से सुरक्षा पर चिंता करना वाजिब है। कुछ साइबर विशेषज्ञों ने भी सुरक्षा का हवाला देते हुए फैसले पर चिंता जाहिर की है।