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अंबेडकर जयंती के बहाने दलितों के वोट की होड़ में लगेंगी भाजपा-कांग्रेस

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दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव अंबेडकर की विरासत पर कब्जा करने की भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत तेज हो गई है। इसकी वजह उत्तर प्रदेश में 2017 और बिहार में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव को माना जा रहा है।
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दलितों को लुभाने के प्रयास के तहत केंद्र सरकार ने अंबेडकर की 125वीं जयंती को बड़ी धूमधाम से मनाने का फैसला लिया है। इसके लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है जोकि विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंबेडकर की जयंती मनाने और उनके विचारों के प्रचार प्रसार के वास्ते विभिन्न कार्यक्रम करने के लिए सुझाव देगी।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी जोरशोर से तैयारी में लगी हुई है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल ने शनिवार को इस संबंध में बैठक भी की। राहुल खुद 2 जून को अंबेडकर की जन्म स्थली मध्य प्रदेश के महू में जाकर कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।
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67 सालों में अंबेडकर को क्या सम्मान दिया गया

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अंबेडकर की विचारधारा और सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर की जा रही 16 बड़ी गतिविधियों के बारे में कैबिनेट को अवगत कराया गया।

अंबेडकर के बहाने प्रसाद और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। गहलोत ने कहा कि राहुल और उनकी पार्टी ने कभी अंबेडकर का सम्मान नहीं किया।

लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद भी कांग्रेस ने उन्हें भारत रत्न नहीं दिया। वहीं प्रसाद ने कहा कि यह तथ्य पूरे राष्ट्र के सामने है कि आजादी के बाद 67 सालों में अंबेडकर को क्या सम्मान दिया गया, जबकि इन 67 सालों में 57 साल कांग्रेस सत्ता में रही।
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