राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा को अति उत्साह और अति आत्मविश्वास में नहीं रहने की नसीहत दी है।
संघ ने कहा है कि दिल्ली तख्त पाने के लिए उसे 180 का आंकड़ा पाने पर ध्यान देना चाहिए। संघ ने साफ संदेश दिया कि व्यक्ति की बजाए भाजपा को मुद्दों पर ज्यादा जोर देना चाहिए।
भाजपा के साथ समन्वय बैठक में संघ नेताओं ने पार्टी को 2004 के लोकसभा चुनाव परिणामों से सबक लेने की सलाह दी। तब अति आत्मविश्वास में भरी भाजपा ‘भारत उदय’ नारे के साथ समय से पहले चुनावी जंग में कूद पड़ी थी और हालत यह हुई कि तब से कांग्रेस के हाथ लगातार दो बार शिकस्त पा चुकी है।
जोशी, आडवाणी नदारद
इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठते रहे। हालांकि भाजपा ने दावा किया कि ये दोनों नेता पहले से तय कार्यक्रम के चलते दिल्ली से बाहर थे।
बहरहाल, सूत्रों के अनुसार संघ नेता भैय्या जी जोशी, सुरेश सोनी और दत्तात्रेय हंसबोले ने भाजपा के दिग्गजों से कहा कि उन्हें अभी उन क्षेत्रों में जनाधार बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे लोकसभा चुनाव में उसे कम से कम 180 सीटें मिल जाएं।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, पार्टी की चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली, पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी व संगठन महामंत्री रामलाल के साथ दिनभर चले विचार-विमर्श के दौरान संघ नेताओं ने ताजा चुनावी सर्वेक्षणों का भी हवाला दिया।
इनमें भाजपा 150 का आंकड़ा पार करती नहीं दिख रही है। जबकि महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के बावजूद कांग्रेस भी ज्यादा पीछे नहीं दिख है।
180 का आंकड़ा पार करने पर जोर
संघ की चिंता यह है कि कांग्रेस के साथ तो गठबंधन के लिए बहुत सारे दल है, जबकि भाजपा के साथ आज भी गिने-चुने दल हैं। चुनाव बाद की स्थिति तभी बदलेगी जब भाजपा के पास कम से कम 180 का आंकड़ा हो।
इसी तरह यह बात भी कही गई कि जिस युवा वर्ग पर भाजपा की नजर है उनमें दलित, ओबीसी व अल्पसंख्यक वर्ग से भी होंगे और इनमें से कितने युवा मोदी के नाम पर भाजपा के साथ आएंगे।
जबकि मोदी के नाम पर भाजपा इस कदर उत्साहित है कि उसे लगने लगा है कि केंद्र में अगली सरकार उसी की बनने जा रही है।