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भाजपा को भा रहा है ममता का हमलावर रुख

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में खुद की नंबर दो की हैसियत बनाने में जुटी भाजपा को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पार्टी के प्रति हमलावर रुख भा रहा है।
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भाजपा-तृणमूल कांग्रेस के बीच लगातार हो रही सीधी सियासी जंग से राज्य में न केवल वाम दल और कांग्रेस सियासी दांवपेंच में पीछे छूट रहे हैं, बल्कि भाजपा को राज्य में रणनीति के मुताबिक ही व्यापक प्रचार भी मिल रहा है।

खासतौर से बीते दिनों पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को कोलकाता में रैली करने की इजाजत न मिलने से भी भाजपा रणनीतिकार खुश हैं। दरअसल भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस और उसकी मुखिया ममता बनर्जी को मुस्लिम तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने की रणनीति बनाई है।
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इसके तहत पार्टी जहां राज्य भर में इमाम को वेतन मिलने, राज्य में आतंकवाद के फलने फूलने के मुद्दे को जोरशोर से उठा रही है, वहीं शारदा चिट फंड मामले में सीधे ममता पर हमला बोल उनकी ईमानदार छवि को तार तार करने में जुटी है।

पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि चूंकि राज्य की सियासत में फिलहाल तृणमूल और भाजपा में ही सीधी सियासी भिड़ंत दिख रही है, ऐसे में लोकसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने वाली भाजपा अगले विधानसभा चुनाव में वाम दलों को पीछे छोड़ कर राज्य की दूसरी ताकत बन सकती है।
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ममता को चौतरफा घेरने की है रणनीति

इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के नतीजे ने लोगों को हैरत में डाल दिया था। भाजपा हालांकि यहां महज दो ही सीट जीत पाई थी, मगर उसके वोट में बीते लोकसभा चुनाव के मुकाबले 12 फीसदी की अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई थी।

इसके बाद ही खुद पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के विस्तार के लिए इस राज्य को पहले नंबर पर रखा। इस क्रम में जहां राज्य के सभी बूथों पर पार्टी की एक टीम बनाने का फैसला किया गया, वहीं शारदा चिट फंड और टीएमसी की कथित मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ लगातार आंदोलन की रणनीति बनी।

दरअसल इसके जरिए पार्टी नंबर दो की लड़ाई में वाम दलों को पीछे तो कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाना चाहती थी। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं पर लगातार हो रहे हमले और टीएमसी के भाजपा पर लगातार निशाना साधने के बाद पार्टी को अपनी रणनीति सही दिशा में जाती दिख रही है।

ममता की मुश्किल यह है कि शारदा चिट फंड घोटाला, बर्धमान में आतंकवाद के पैर पसारने के सबूत मिलने से उनके साथ-साथ उनकी पार्टी का ग्राफ गिरा है। इस मामले की सीबीआई जांच के बाद पार्टी के दो सांसद जहां गिरफ्तार किए जा चुके हैं, वहीं करीब आधा दर्जन सांसद जांच के घेरे में हैं।

चूंकि इनमें से कुछ सांसद ममता के बेहद करीबी हैं, इसलिए भाजपा के लिए सीधे मुख्यमंत्री पर हमला बोलना आसान हो गया है। इसके अलावा इमाम को राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे वेतन, बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मामले पहले से भाजपा की हिंदूवादी राजनीति को रास आते रहे हैं।

ममता की मुश्किल यह है कि राज्य के 28 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं के मद्देनजर वह भाजपा पर सीधा हमला तो बोल रही हैं, मगर इस बीच उन पर आतंकवाद और भ्रष्टाचार से समझौता करने के मजबूत आरोप लग रहे हैं।
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कोलकाता रैली अमित शाह ने भरी हुंकार

कानूनी लड़ाई के बाद रैली की इजाजत पाने वाले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रैली में अड़चन बनी ममता सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया। पश्चिम बंगाल से टीएमसी सरकार को उखाड़ फेंकने का ऐलान करते हुए शाह ने कहा कि बर्दवान धमाके में आरोपी टीएमसी नेताओं को बचाया जा रहा है। इसलिए ममता बनर्जी एनआईए जांच का विरोध कर रही हैं।

रविवार को रैली के दौरान पार्टी की सबसे बड़ी रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने आरोप लगाया कि शारदा चिटफंड घोटाले के पैसे का इस्तेमाल बर्दवान धमाके को अंजाम देने के लिए किया गया। मालूम हो कि धमाके को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआईए जांच के विरोध के बाद आरएसएस पर आरोप लगा चुकी हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने सीबीआई के बेजा इस्तेमाल का आरोप लगा रहीं ममता को चुनौती देते हुए कहा कि दम है तो दीदी यह कह कर दिखाएं कि शारदा चिटफंड घोटाले में जिनकी गिरफ्तारी हुई है वे निर्दोष हैं। पहले यह केवल आरोप था लेकिन अब साबित हो चुका है कि घोटाले में टीएमसी के नेता शामिल हैं। ममता की पेंटिंग की खरीदारी करने वालों का नाम उजागर करने की भी उन्होंने चुनौती दी।

उन्होंने काला धन पर संसद के बाहर विरोध करने वाले टीएमसी नेताओं पर चुटकी लेते हुए कहा कि शारदा घोटाले में जो पैसा हड़पा गया वो काला धन था या वैध धन था? ममता पर वोट बैंक की राजनीति के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए शाह ने कहा कि टीएमसी बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है।

जबकि बंगाल की जनता घुसपैठियों को नकार चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि बर्दवान धमाके में आरोपी आतंकी शकील अहमद को बंगाल पुलिस ने शुरुआत में क्यों बचाने की कोशिश की।

अजान के वक्त चुप हो गए शाह
धर्मतल्ला में रैली को संबोधित कर रहे अमित शाह बगल की टीपू सुल्तान मस्जिद से नमाज के लिए अजान होते ही चुप हो गए। उन्होंने अपना भाषण रोक कर अजान पूरा होने का इंतजार किया और फिर उसके बाद भाषण दिया।
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