2जी स्पेक्ट्रम मामले में बृहस्पतिवार को हुई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक का बीजेपी ने फिर बहिष्कार किया है। बीजेपी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 2जी मामले में जेपीसी के समक्ष गवाह के रूप में बुलाए जाने पर अड़ी हुई है। वहीं, वाम दल और बसपा सिर्फ वित्त मंत्री को बुलाने के पक्ष में हैं।
इससे पूर्व जेपीसी की 11 अक्टूबर की बैठक में भी बीजेपी सदस्य नहीं आए थे और आरोप लगाया था कि समिति के अध्यक्ष पीसी चाको गवाहों की सूची को अंतिम रूप देने और उसमें प्रधानमंत्री और चिदंबरम को शामिल करने में असफल रहे हैं। जेपीसी में भाजपा के छह सदस्य हैं।
पूर्व वित्त मंत्री और जेपीसी में बीजेपी सदस्य यशवंत सिन्हा ने चाको को पत्र लिख कर कहा था कि समिति विशेष प्रकृति की है और वह स्वयं नए मानक तय कर सकती है। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि टू जी मामले में प्रधानमंत्री ने कुछ फैसले किए थे जिनके बारे में केवल वही बता सकते हैं।
सिन्हा ने पत्र में कहा था कि मेरे विचार से इस बारे में कोई विवाद नहीं हो सकता कि घोटाला असामान्य प्रकृति का है और समिति को अलग प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है जैसा कि पूर्व में अन्य जेपीसी ने लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से किया। उन्होंने तर्क दिया था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसी मुद्दे पर संसद की लोकलेखा समिति के सामने उपस्थित होने की पेशकश की थी और उन्हें जेपीसी के समक्ष गवाही देने में कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए।
भाजपा सदस्य ने चाको को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि वह तब तक जेपीसी की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे जब तक गवाहों की सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जाता और प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री को नहीं बुलाया जाता है।