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भाजपा को मिल ही गई RJD-JDU की कमजोर कड़ी

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बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की उम्मीदें जदयू-राजद की आपसी खींचतान पर टिकी हैं। सर्वे और तमाम माध्यमों के जरिए भाजपा आलाकमान के सामने जो जमीनी सच्चाई सामने आ रही है उसमें जदयू और राजद के गठजोड़ की विफलता ही पार्टी के मंसूबे पूरे कर सकती है।
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इससे पार्टी आलाकमान की चिंता बढ़ी हुई है। यही वजह है कि पार्टी ने प्रचार अभियान की अपनी पूरी रणनीति लालू और नीतीश की एकजुटता को कमजोर करने पर केंद्रित कर दी है।

जदयू और राजद प्रमुख के रिश्तों की दरार बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने के प्रयासों के तहत भाजपा ने आक्रामक हमले बोल कर चुनाव की तिथि घोषित होने से पहले ही प्रचार में तल्खी ला दी है।
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जदयू-राजद की आपसी खींचतान पर टिकी भाजपा की उम्मीदें

जदयू-राजद गठबंधन में भाजपा को नीतीश और लालू के बीच का नाजुक रिश्ता ही कमजोर कड़ी के रूप में दिखाई दे रही है। इसलिए, भाजपा ने जदयू-राजद की कमजोर कड़ी पर वार का निर्णय लिया है।

चुनावी जीत के लिए भाजपा भुजंग प्रसाद और चंदन कुमार जैसे जुमलों के सहारे जदयू-राजद की कमजोर कड़ी पर वार करेगी। इस प्रयास के तहत ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गया की परिवर्तन रैली में पार्टी के प्रचार अभियान को आगे बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री का चेहरा पेश करने में मात खाई भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में जनता परिवार पर बढ़त बना ली है। जदयू के वरिष्ठ नेता के अनुसार दो महीने पहले मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भी लालू यादव के साथ नीतीश कुमार का साझा चुनाव प्रचार अभियान शुरू होना तो दूर अभी उसकी रणनीति तक नहीं बन पाई है।

हो रहा है जुमले का असर
दरअसल लालू के साथ आने के बाद नीतीश ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि जिस तरह जंगल मे चंदन के सांप से घिरे रहने के बावजूद उसकी खुशबू पर असर नहीं पड़ता उसी तरह उन पर भी असर नहीं पड़ेगा।

इस बयान के जरिए नीतीश ने लालू को सांप करार दिया था। इस विवाद को हवा देने के लिए ही पीएम ने लालू के लिए भुजंग प्रसाद तो नीतीश के लिए चंदन कुमार का जुमला इस्तेमाल किया था। भाजपा आलाकमान का मानना है कि पार्टी का यह दांव चलता दिख रहा है।

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