पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक के विवादित बयानों ने भाजपा का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। खासतौर पर बाबरी विध्वंस मामले की मुंबई के आतंकी हमले से तुलना करने पर मुख्य विपक्ष ने मलिक को आड़े हाथ लिया है। संसद में केंद्र सरकार पर बरसते हुए भाजपा ने कहा कि गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने पर पाक मंत्री से कड़ा प्रतिरोध क्यों नहीं जताया।
पार्टी ने यह भी कहा कि शिंदे ने आखिरकार मलिक के सामने पाकिस्तान में हिंदुओं की दुर्दशा, सरक्रीक मामला, शहीद कैप्टन सौरभ कालिया को पकड़ने के बाद यातना देकर मार डालने जैसे मुद्दे क्यों नहीं उठाए। मलिक के विवादित बयानों पर अब तक खामोश रहे शिंदे संसद के दोनों सदनों में भाजपा के निशाने पर रहे। लोकसभा में वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा और राज्यसभा में रविशंकर प्रसाद ने इस मामले पर सरकार को आड़े हाथ लिया।
सिन्हा ने कहा कि जब तक पाकिस्तान हाफिज सईद समेत मुंबई हमलों के सभी दोषियों को भारत के हवाले नहीं कर देता है, तब तक उससे बातचीत नहीं की जानी चाहिए। मलिक ने जिस तरह के बेतुके बयान दिए, उससे देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि पाक मंत्री लगातार विवादित बयान देते रहे और शिंदे चुपचाप देखते रहे, जबकि सरकार की ओर से उन्हें दो टूक जवाब दिया जाना चाहिए था। सिन्हा ने कहा कि मलिक ने जिस तरह भारत आकर अपने बयानों से हमारा अपमान किया है उसे देखते हुए पाकिस्तान क्रिकेट टीम के इसी हफ्ते से शुरू हो रहे भारत दौरे को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
राज्यसभा में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मलिक ने जो कुछ कहा वह अवांछित और बिना उकसावे के था। भाजपा इसकी कड़ी निंदा करती है। उन्होंने कहा कि यदि पाक मंत्री किसी एजेंडा सेे आए थे तो उन्हें यहां क्यों आने दिया गया। प्रसाद ने कहा कि बाबरी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक व्यवस्था दी है और वहां मस्जिद होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। उन्होंने जानना चाहा कि सरकार ने मलिक के साथ यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया। पड़ोसी देश को साफ तौर पर बता देना चाहिए था कि यह हमारा आंतरिक मामला है। इसी तरह अत्याचारों के कारण पाकिस्तान से भारत आ रहे हिंदुओं का मामला भी क्यों नहीं उठाया गया।