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वोटिंग के दिन मोदी कर रहे थे खेल, तीसरी बार में फंसे!

Thu, 01 May 2014 03:31 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने वोट डालने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान वो बार-बार पार्टी का निशान 'कमल' दिखा रहे थे। उसी जगह उन्होंने सेल्फी ली, तो हाथ में कमल था।
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इसके जरा देर बाद कांग्रेस ने इसे प्रचार बताते हुए आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया और शिकायत करने चुनाव आयोग पहुंची। आयोग ने इस मामले में सख्ती दिखाई और मोदी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मामला दर्ज करने का आदेश सुनाया।

शाम तक उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हो चुकी थी। मोदी ने इस पर निराशा जताई और कांग्रेस ने खुशी। लेकिन क्या यह संयोग है कि जिस दिन वोटिंग जारी थी, उसी वक्त मोदी ने यह सारा कार्यक्रम किया। या इसके पीछे भाजपा की कोई रणनीति काम कर रही है।
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तीन बार किया भाजपा ने खेल

यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ, क्योंकि भाजपा के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ। तीन ऐसे मौके हैं, जब भगवा दल ने कोई न कोई बड़ा कार्यक्रम कर मीडिया की निगाह अपनी तरफ खींची।

यूं तो मोदी के खिलाफ पहले भी शिकायत की गई थी। लेकिन चुनाव आयोग ने बुधवार को पहली बार उनके खिलाफ सख्त रुख दिखाया। लेकिन भाजपा की ऐसी कौन सी रणनीति है, जिसे बड़े महीन अंदाज में रचा गया है। कांग्रेस की निगाह इस पर चली गई है।

बुधवार पहला दिन नहीं था, जब लोकसभा के किसी चरण के लिए मतदान हो रहा हो और सभी टीवी चैनलों पर मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और तस्वीरें दिखाई जा रही हों। 7 अप्रैल से शुरू हुए चुनावी महासमर में अब तक ऐसा तीन दफा हो चुका है। कब और क्या-क्या, खुद गौर कीजिए।

पहले चरण की वोटिंग के बीच आया मेनिफेस्टो

पहला मामला घोषणापत्र से जुड़ा है। वोटिंग से पहले भाजपा पर हमले बोले जा रहे थे क‌ि उसे घोषणापत्र सामने रखने में इतनी देर क्यों हो रही है? ऐसा भी कहा गया कि भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी का मेनिफेस्टो मोदी को पसंद नहीं आया है। जो मेनिफेस्टो सामने आया, उसे मोदीफेस्टो भी कहा गया।

यह दिलचस्प है कि भाजपा ने अपना घोषणापत्र जारी करने में काफी देर की और इसे 7 अप्रैल को सामने रखा गया। इसी दिन लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान होना था। शुरुआत में खबर आई कि चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक जब भाजपा का घोषणापत्र जारी होगा, तो टीवी चैनल इस कार्यक्रम का प्रसारण नहीं कर पाएंगे।

लेकिन जब भाजपा का मेनिफेस्टो सामने आया, तो इस कार्यक्रम का प्रसारण सभी टीवी चैनल ने किया। पहले मोदी का भाषण हुआ, फिर मुरली मनोहर जोशी ने संवाददाताओं के सवाल के जवाब दिए।

24 अप्रैल की वोटिंग के दिन बनारस का रोड शो


जब कुछ सीटों पर वोटिंग हो रही थी, तो भाजपा का घोषणापत्र जारी होने का कार्यक्रम लाइव दिखाया जा रहा था। जाहिर है, मतदाताओं पर इसका असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

दूसरा मामला, बनारस से जुड़ा है। 24 अप्रैल का दिन नरेंद्र मोदी ने नामांकन दाखिल करने के लिए चुना। भाजपा ने पर्चा दाखिल होने से पहले मोदी के रोड शो में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यह पर्चा भरने का आखिरी दिन था।

इत्तफाक की बात है कि 24 अप्रैल को भी कई सीटों पर वोटिंग हो रही थी। ऐसे में भाजपा ने मोदी के रोड शो के लिए भारी भीड़ जुटाकर मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की। कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और उसके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई।

फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कमल दिखाया

ऐसा भी बताया गया है कि जिन सीटों पर वोटिंग हो रही थी, भाजपा कार्यकर्ताओं ने वहां बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाकर इस रोड शो का सीधा प्रसारण कराया। यह उसकी रणनीति का हिस्सा था।

तीसरा मामला बुधवार से जुड़ा है, जब गुजरात की सभी 26 सीट समेत देश भर में कुल 89 सीटों पर मतदान हो रहा था। इस रोज भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी की अहमदाबाद सीट में नरेंद्र मोदी वोट डालने पहुंचे।

जब वो वोट डालने मतदान केंद्र के भीतर पहुंचे, तो एक छोटे से बच्चे ने उनके पैर छु‌ए और गुजरात के मुख्यमंत्री ने उसके सिर पर हाथ रख दिया। यह सवाल शायद लोगों के दिमाग में आया हो कि बूथ के भीतर बच्चा कैसे आया। लेकिन असल खेल बाहर हुआ।
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तीसरी बार में फंस गई भाजपा

जब नरेंद्र मोदी वोट डालने के बाद बाहर निकले, तो वहां मीडिया से बातचीत करने के लिए सारे इंतजाम किए गए थे। यह और बात है कि भाजपा ने कहा कि मीडिया को वहां उन्होंने नहीं बुलाया था।

मोदी ने यहां संवाददाताओं को संबोधित किया और बाद में उनके सवालों के जवाब दिए। सारा वक्त उनके हाथ में कमल का निशान था, जिसे लेकर बाद में एफआईआर दर्ज की गई।

इस दौरान वोटिंग जारी थी और टीवी पर मोदी दिख रहे थे। वोटिंग के इन तीन दिन, भाजपा ने अपनी तीन खास रणनीतियों को अमल दिया। पहले मेनिफेस्टो, फिर रोड शो और आखिर में मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस। मतदान के दौरान टीवी पर छाने का यह प्लान चुनाव आयोग की आंखों में खटक गया है।
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