कांठ महापंचायत से पल्ला झाड़ चुकी भाजपा ने एक बार फिर कांठ कूच का ऐलान किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा की मीटिंग के बाद प्रदेश प्रवक्ता ने घोषणा की है कि 26 जुलाई को वेस्ट यूपी के सभी भाजपा सांसद, विधायक और पदाधिकारी कांठ जाएंगे और एसएसपी मुरादाबाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने में तहरीर देंगे। इसी दिन पूरे प्रदेश में भाजपा जिला और तहसील मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा पार्टी बदहाल कानून व्यवस्था और तुष्टिकरण के मुद्दे पर यूपी सरकार के खिलाफ राज्यपाल का दरवाजा भी खटखटाएगी।
भाजपा का कांठ आंदोलन एक नहीं दो बार ढेर हो चुका है। पहले घोषणा के बाद भाजपा महापंचायत से पल्ला झाड़ गई और फिर 15 जुलाई से घोषित आंदोलन भी भाजपा नहीं चला सकी। इसकी वजह से कार्यकर्ताओं और पब्लिक के बीच हो रही फजीहत से चिंतित पार्टी ने बुधवार को वेस्ट यूपी के सभी पदाधिकारियों की बैठक कॉल की। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने बताया कि पार्टी ने तय किया है कि 26 जुलाई को पश्चिमी यूपी के सभी भाजपा सांसद, विधायक और पार्टी पदाधिकारी कांठ थाने जाकर एसएसपी मुरादाबाद धर्मवीर सिंह के खिलाफ तहरीर देंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं को थाने में बर्बरता से पीटने, पेशाब पिलाने और सिख कार्यकर्ताओं की पगड़ी उछालने के मामले में एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
प्रदेश प्रवक्ता का कहना था कि पार्टी तुष्टिकरण में अंधी प्रदेश सरकार को हठधर्मिता कर बहुसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं और आस्थाओं को कुचलने की छूट नहीं देगी। सपा को सबक सिखाने के लिए भाजपा 26 जुलाई को पूरे प्रदेश में जिला एवं तहसील मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करेगी। इसके बाद भाजपा सांसद, विधायक और पदाधिकारी राज्यपाल से मिलकर प्रदेश की बदहाल कानून व्यवस्था और उसके एकपक्षीय निर्णयों के बारे में उन्हें जानकारी देंगे। विजय बहादुर पाठक का कहना है कि कार्यकर्ताओं का अपमान करने वाले सपाई एजेंट पुलिस कप्तान को बख्शा नहीं जाएगा।
आठ से दस भाजपाइयों पर रासुका लगना तय
कांठ के अकबरपुर चैदरी गांव में धर्मस्थल से लाउडस्पीकर उतारे जाने के बाद और फिर महापंचायत का ऐलान होने के बाद कांठ में हुए बवाल में शामिल भाजपाइयों पर रासुका लगाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई। पुलिस अफसरों ने आठ से दस लोगों के नाम सूची में शामिल करने का मन बनाया है। इसमें चार लोग पहले दिन हुए बवाल में शामिल थे। बाकी चार जुलाई को हुए बवाल में शामिल बताए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि दोनों बवालों में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जीडी में जो भाषा दर्ज की थी, वह रासुका लगाने की बुनियाद रखती हुई प्रतीत हो रही थी। अब पुलिस ने रासुका की कार्रवाई शुरू कर दी। पहले दिन 27 जून को हुए बवाल में शामिल नेताओं उत्तमपाल, हितेश, नवीन चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगना तय माना जा रहा है। इसके अलावा चार तारीख को हुए बवाल में गिरफ्तार हुए मुख्य नेता भी शामिल किए जा रहे हैं। बुधवार को थाने में अफसर इसी सूची पर मंथन करते रहे। कुछ नाम जोड़े गए और फिर हटाए गए।
एसएसपी धर्मवीर ने बताया कि सूची अभी फाइनल नहीं हुई है। वीडियो फुटेज और अन्य सबूत एकत्र करके मजबूत फाइल तैयार की जा रही है। गुरुवार तक सूची फाइनल कर दी जाएगी। डीआईजी और कमिश्नर के आदेश के बाद रासुका लगा दी जाएगी।
भाजपा नेताओं की जमानत याचिका खारिज
कांठ बवाल में पिछले बारह दिन से जिला जेल में बंद साठ भाजपा कार्यकर्ताओं को अदालत से भी राहत नहीं मिली। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ने सुनवाई के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले भाजपा नेताओं की वकालत के अधिवक्ताओं की फौज अदालत में डटी रही। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद दोपहर में फैसला सुरक्षित रख लिया। शाम तक भाजपाई और अधिवक्ता कयास लगाते रहे, लेकिन जब शाम को अदालत का फैसला आया तो भाजपा खेमे में मायूसी फेल गई। जमानत के लिए भाजपा नेताओं को अब हाईकोर्ट की दौड़ लगानी होगी।
कांठ बवाल में भाजपा के अमरोहा जिलाध्यक्ष गिरीश त्यागी, संभल जिलाध्यक्ष महेश चंद्र गुप्ता, संभल के पूर्व जिलाध्यक्ष डा. नरेंद्र सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख नरेंद्र सिंह समेत साठ भाजपा कार्यकर्ता पांच जुलाई से जिला जेल में बंद हैं। पुलिस ने चार जुलाई को बवाल के तुरंत बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया था, हालांकि इनमें से ज्यादातर बवाल के पहले से ही पुलिस हिरासत में थे। मुकदमे के दो अन्य अभियुक्तों अधिवक्ता सुधीर कुमार निवासी चंदक, मंडावली बिजनौर और अधिवक्ता मुकेश भारद्वाज निवासी बुद्धि विहार को अदालत ने पांच जुलाई को ही अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया था।
बाकी साठ अभियुक्तों की जमानत याचिका पर बुधवार को एडीजे - तृतीय अजय त्यागी की अदालत में सुनवाई हुई। अभियुक्तों की ओर से पचास से अधिक अधिवक्ता उनकी पैरवी के लिए कोर्ट में पहुंचे और मुकदमे को झूठा बताते हुए अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया। जबकि अभियोजन की ओर से डीजीसी क्रिमिनल संजीव अग्रवाल ने यह कहते हुए जमानत का विरोध किया कि अभियुक्तों ने धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश की जिसमें बवाल हुआ और जिलाधिकारी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। डीएम की आंख की रोशनी चली गई। अदालत ने शाम को अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने से इंकार करते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।