केंद्र सरकार ने भाजपा पर सीबीआई के मसले पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया है। साथ ही सरकार ने मुख्य विपक्षी पार्टी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वह जांच एजेंसी पर भरोसा रखती है या नहीं।
इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर की साजिश की जानकारी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह के शामिल होने के सीबीआई के दावे पर सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि जल्द ही पता चल जाएगा कि किसकी दाढ़ी में तिनका है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है और जब तक सीबीआई आरोप पत्र दायर नहीं कर देती तब तक इस बारे में टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
मोदी-शाह को थी इशरत फर्जी एनकाउंटर की जानकारी?
सीबीआई के दुरुपयोग के मोदी के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा सीबीआई के मसले पर दोहरा मानदंड अपनाती है।
हरेन पांड्या मामले में भाजपा का रुख अलग होता है और अन्य मामलों पर अलग। भाजपा को पहले यह फैसला कर लेना चाहिए कि उसे सीबीआई पर विश्वास है या नहीं।
तिवारी ने कहा कि भाजपा की विचारधारा को बढ़ावा मिला तो देश को मेनिनजाइटिस हो जाएगा। भाजपा कम्यूनलाइटिस, फंडामेंटलाइटिस और सेपरेटाइटिस से ग्रसित है।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के कांग्रेस को सेक्यूलराइटिस से ग्रसित करार देने के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा को अपने गिरेबां में झांक कर देखना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने एक पुलिस अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए दावा किया है कि मोदी और शाह ने ही मुंबई की 16 वर्षीय छात्रा इशरत को मारने की साजिश रची थी।
अधिकारी ने अपने बयान में कहा है कि सफेद और काली दाढ़ी वाले व्यक्ति ने ही फर्जी एनकाउंटर की अनुमति दी थी। सफेद दाढ़ी से मोदी और काली दाढ़ी से शाह की ओर इशारा किया गया है।
'आईपीएस पांडे ने रैंबो की तरह काम किया'
इधर, गुजरात हाईकोर्ट ने प्रदेश पुलिस के शीर्ष अधिकारी पीपी पांडे की याचिका पर अपने आदेश को एक जुलाई तक सुरक्षित रखा है।
पांडे ने इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को समाप्त करने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर मामले की जांच कर रही सीबीआई ने उन्हें 2004 में हुए एनकाउंटर का मास्टरमाइंड करार दिया है।
सीबीआई के मुताबिक, एडिशनल डीजीपी पांडे ने पूरे ऑपरेशन में एक्शन हीरो रैंबो की भांति काम किया। इशरत और तीन अन्य लोगों को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने इन सभी को आतंकी करार देते हुए मार गिराया था।
जस्टिस हर्षा देवानी ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर अपने फैसले को 1 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया। सीबीआई कोर्ट ने 198266 बैच के आईपीएस अधिकारी पांडे को 21 जून को भगोड़ा घोषित किया था।
पांडे ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने केवल खुफिया इनपुट को पास किया था, जिसके आधार पर मुख्यमंत्री की हत्या के उद्देश्य से शहर में घुसे चार लोगों में से दो आतंकियों को मार गिराया गया।
आईपीएस अधिकारी ने तर्क दिया कि उनकी भूमिका इस मामले में केवल खुफिया इनपुट मुहैया कराने तक सीमित थी। उनके तर्क पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने दावा किया कि चार लोगों की हत्याओं का मास्टरमाइंड पांडे ही थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे एनकाउंटर के पीछे वही थे। उन्होंने ही इसे अंजाम तक पहुंचाया। उन्होंने इनपुट हासिल किए, उसे अपने अधीनस्थों को पास किया और सभी व्यवस्थाएं कराई। हकीकत में पूरा ऑपरेशन उनके कंट्रोल में था। उन्होंने रैंबो की तरह काम किया।