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बीजू जनता दल का है अपने ही बागियों से मुकाबला

Sun, 30 Mar 2014 10:28 AM IST
संदीप साहू/बीबीसी हिंदी डॉटकॉम
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इस बार चुनाव में ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) की लड़ाई विरोधी कांग्रेस या भाजपा से नहीं, बल्कि अपने आप से हो रही है। पार्टी द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद कई बीजद नेता अब बागी प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतर गए हैं। इस बार बीजद ने अपने 108 विधायकों में से 35 को और 14 सांसदों में छह को टिकट न देने का फैसला लिया है।
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शनिवार को राज्य में एक साथ होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए नामांकन पत्र वापस लेने कि अंतिम तारीख थी। अभी तक मिली सूचना के अनुसार लगभग 40 बागी बीजद प्रत्याशियों में से लगभ्ाग आधे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है।

मगर नवीन पटनायक सरकार की पूर्व मंत्री अंजलि बेहेरा सहित कई बागी प्रत्याशी अभी भी मैदान में बने हुए हैं। अगर ये अंत तक बीजद के आधिकारिक प्रत्याशियों का विरोध करते रहे, तो लगातार चौथी बार सत्ता में आने की पार्टी की उम्मीद खटाई में पड़ सकती है।
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'मनुहार और धमकी'

नामांकन पत्र वापस लेने की समय सीमा खत्म होते ही बीजद ने बेहेरा और दो अन्य बागी प्रत्याशियों- चंपुआ से कुश आपट और एरसमा बालिकूदा से रघुनन्दन दास को पार्टी से बाहर कर दिया।

ऐसा नहीं है कि जिन बागी प्रत्याशियों ने अपना नामांकन वापस ले लिया है, वे अब पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को जिताने के लिए जी-जान से जुट जाएंगे। आज नामांकन वापस लेने वालों में पिछले चुनाव में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जयदेव जेना को 23,000 से भी अधिक वोट से मात देने वाले आनंदपुर के विधायक भागीरथी सेठी भी थे।

उनके एक मज़बूत समर्थक ने फोन पर बताया, "सेठी जी ने पार्टी सुप्रीमो नवीन पटनायक के कहने पर अपना नामांकन जरूर वापस ले लिया है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि भाजपा से लाए गए प्रत्याशी को हम समर्थन देंगे।"

मान-मनोवल की कोशिश

समर्थक का कहना है कि उनके पार्टी नेतृत्व ने 'मैच फ़िक्सिंग' की है, जिसके तहत पूर्व भाजपा विधायक मायाधर जेना को टिकट दिया गया है। बागी विधायकों को मनाने के लिए बीजद नेताओं को कम पापड़ नहीं बेलने पड़े हैं।

पार्टी सूत्रों की मानें तो इसके लिए चाणक्य के बताए गए चारों सूत्र, यानी साम, दाम, दंड और भेद का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री दफ्तर के कुछ अधिकारी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

पूर्व इस्पात और खान मंत्री रघुनाथ मोहांती की ही मिसाल ली जाए। जैसे ही यह साफ हुआ कि लगातार पांच बार बालेश्वर जिले के बस्ता विधानसभा क्षेत्र से जीतने वाले मोहांती इस बार टिकट कटने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरने की तैयारी में हैं, उन्हें मनाने की कोशिशें शुरू हो गईं।

'नामांकन भरा तो जेल'

विश्वसनीय बीजद सूत्रों के अनुसार जब इन कोशिशों से काम नहीं बना, तो आखिरकार इस अधिकारी ने, जो आजकल ओडिशा के 'दूसरे सबसे प्रभावशाली व्यक्ति' के रूप में जाने जाते हैं, ने फ़ोन पर मोहांती से बात की और उन्हें धमकी दी कि अगर वह नामंकन भरते हैं, तो उन्हें और उनके परिवार को जेल की चक्की पीसनी होगी।

ग़ौरतलब है कि अपनी बहू बरसा सोनी चौधरी द्वारा दायर दहेज उत्पीड़न के मामले के बाद मोहांती को न केवल अपने मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था बल्कि उनके पूरे परिवार को कुछ दिन के लिए जेल की हवा खानी पड़ी थी। इस समय वे जमानत पर हैं।

टिकट न मिलने से असंतुष्ट बीजद नेताओं में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बागी भले न बनें हों, पर पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी का खुलकर विरोध कर रहे हैं। इनमें एक हैं जाजपुर लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके बीजद सांसद मोहन जेना, जिन्हें इस बार टिकट नहीं दिया गया।

करीबियों को टिकट

जेना ने कहा, "मेरे स्थान पर जिस महिला को टिकट दिया गया है, उन्हें उनके गांव वालों के अलावा कोई जानता तक नहीं है। अगर मेरा टिकट काटना ही था, तो जाजपुर में योग्य प्रत्याशियों की कोई कमी नहीं थी।"

जेना के स्थान पर इस बार जिला परिषद सदस्य रीता तराई को बीजद का लोकसभा उम्मीदवार बनाया गया है। जेना उन्हें टिकट न दिए जाने के लिए उन्हीं के जिले के प्रभावशाली मंत्री कल्पतरु दास को सीधे जिम्मेदार ठहराते हैं।

उनका कहना था, "कल्पतरु दास के करीबी होने के अलावा इस महिला के पास टिकट पाने के लिए कोई दूसरा दावा नहीं था। उन्होंने मैट्रिक भी पास नहीं किया है।"

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'नवीन के नाम पर पड़ते हैं वोट'

हालांकि कल्पतरु दास, जो इस समय नवीन पटनायक के सबसे क़रीबी नेता माने जा रहे हैं, इस आरोप का खंडन करते हैं। उन्होंने कहा कि जेना के आरोप 'निराधार' हैं और टिकट न मिलने की निराशा से प्रेरित हैं।

जो भूमिका अभी दास निभा रहे हैं, वह पिछले चुनाव में नवीन पटनायक के तत्कालीन प्रमुख सलाहकार और पार्टी के 'मार्गदर्शक' प्यारीमोहन महापात्र निभाया करते थे। वह कहते हैं कि इन बागियों को पार्टी के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, "लोग नवीन जी के नाम पर वोट डालते हैं, प्रत्याशी चाहे कोई भी हो।"

लेकिन समीक्षकों का मानना है कि बागी सभी सीटों में भले नहीं पर कुछ सीटों में पार्टी प्रत्याशियों के जीतने में अड़चनें ज़रूर पैदा कर सकते हैं।
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