केंद्र की मोदी सरकार के पहले विस्तार में मंत्री बनाए गए चौधरी बीरेंद्र सिंह और सुरेश प्रभु का हरियाणा से राज्यसभा जाना लगभग तय हो गया है। ये दोनों ही कैबिनेट मंत्री अभी संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।
हरियाणा से राज्यसभा उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग की घोषणा के बाद भाजपा नेतृत्व ने दोनों को यहां से उच्च सदन में भेजने का निर्णय लिया है। इस संदर्भ में जल्द ही औपचारिक ऐलान किया जाएगा। हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटें खाली हैं।
हरियाणा से राव इंद्रजीत सिंह और कृष्ण पाल गुर्जर पहले से ही केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं।
पार्टी की रणनीति नजमा हेपतुल्ला की सीट खाली कराकर सुरेश प्रभु को मध्यप्रदेश से राज्यसभा में लाने की थी लेकिन नजमा की राज्यपाल पद पर नियुक्ति में देरी के कारण प्रभु को हरियाणा से ही राज्यसभा में लाया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने ऐलान किया है कि हरियाणा से राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया 18 नवंबर से शुरू होगी। 25 नवंबर नामांकन की अंतिम तिथि रखी गई है।
नामांकन वापस लेने की तारीख 28 नवंबर तय की गई है। अगर चुनाव हुए तो आयोग ने इसके लिए 5 दिसंबर की तारीख तय की है। वैसे राज्य की सियासी गणित शुरू से ऐसी रही है कि सीटें सत्ताधारी दल के खाते में जाती रही हैं।