सार्वजनिक वितरण प्रणाली मतलब धांधली ही धांधली। कार्ड बनाने से लेकर राशन बांटने तक में होता है खेल। कोटे का अनाज बाजारों में बिक जाता है तो मिट्टी का तेल न बांटने की शिकायतें आम हैं। टुकड़ों टुकड़ों में समस्याएं शासन तक पहुंचती रहीं लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। हाल यह हो गया कि दिसंबर माह में चार करोड़ राशन कार्ड एक्सपायर होने की नौबत आ गई।
अमर उजाला ने जब लापरवाही का यह मुद्दा उठाया तो हड़कंप मचा। सरकार स्तर पर मंथन के बाद राशन कार्ड बनाने की तैयारी शुरू की गई। साथ ही साथ धांधली रोकने की कवायद भी है। प्रदेश के मंडल मुख्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बायोमेट्रिक राशन कार्ड बनने जा रहे हैं। शेष अन्य जिलों में फिलहाल सामान्य कार्ड दिसंबर तक जारी होंगे।
प्रदेश में चार करोड़ 41 लाख 16 हजार 447 राशन कार्ड हैं। इनमें बीपीएल कार्ड हैं 65 लाख 88 हजार 413 और अंत्योदय हैं 40 लाख 96 हजार 359। जबकि एपीएल कार्ड सबसे ज्यादा तीन करोड़ 34 लाख 31 हजार 675 हैं। वर्ष 2005 में बने यह सभी कार्ड एक्सपायर हो चुके हैं। 31 दिसंबर को एक्सटेंशन पीरियड भी खत्म हो रहा है।
बायोमेट्रिक राशन कार्ड के लिए चुने गए अट्ठारह जिलों को छोड़कर बाकी सभी जगह मैनुअल कार्ड बनाए जाएंगे। अगले महीने से प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। प्रमुख सचिव खाद्य और खाद्य आयुक्त ने शासन को रिपोर्ट दे दी है। वहां से मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पायलट प्रोजेक्ट में सम्मिलित जिले
मुरादाबाद, बरेली, वाराणसी, चित्रकूट धाम, मिर्जापुर, मेरठ, सहारनपुर, फैजाबाद, गोंडा, बस्ती, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़ और झांसी।
क्या होगी प्रक्रिया
राशन कार्ड एटीएम कार्ड की तरह होगा। इस प्लास्टिक कार्ड पर परिवार के मुखिया की रेटिना और घर के सभी सदस्यों का थंब इंप्रेशन लिया जाएगा। जिला पूर्ति अधिकारी कन्हैया लाल तिवारी ने बताया कि इस कार्ड को राशन डीलर के यहां लगी मशीन पर लगाते ही पूरा रिकार्ड आ जाएगा कि कब-कब राशन लिया गया और कब देय है। अगर मुखिया न भी हो तो घर का सदस्य राशन ला सकता है।