जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने के तीन घंटे के भीतर आम आदमी पार्टी से निष्कासित विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने सोमवार को अपना अनशन खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली की केजरीवाल सरकार को वादे करने के लिए और वक्त देना चाहते हैं।
आम आदमी पार्टी के बागी विधायक ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे की सलाह पर अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली सरकार को दस दिनों का वक्त दिया है।
बिन्नी ने सोमवार सवेरे जंतर मंतर पर अनशन शुरू किया था। इससे पहले वह उप-राज्यपाल नजीब जंग से मिले और युगांडा की महिलाओं के साथ कानून मंत्री सोमनाथ भारती के कथित दुर्व्यवहार की बात उठाई।
उप-राज्यपाल से भी मिले बागी विधायक
खिड़की एक्सटेंशन इलाके में कुछ दिन पहले आधी रात के वक्त छापा मारने को लेकर विवाद हो गया था। सोमनाथ भारती पुलिस को रेड मारने के लिए कह रहे थे, जबकि आला अधिकारी तय प्रक्रिया के मुताबिक ही काम करने को तैयार थे।
विनोद कुमार बिन्नी ने कहा, "उप राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि जिन लोगों ने कानून का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी, भले वे किसी भी पद पर क्यों न हों।"
नजीब से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बिन्नी ने कहा, "मुझे लगता है कि आम आदमी पार्टी चाहती है कि दिल्ली सरकार गिर जाए, क्योंकि उन्हें डर है कि जो वादे जनता से किए गए, उन्हें पूरा करना मुमकिन नहीं है। और वे अपनी जिम्मेदारियों से भागने की कोशिश कर रहे हैं।"
'केजरीवाल सरकार ने किए झूठे वादे'
लक्ष्मी नगर से विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने यह इल्जाम भी लगाया कि आम आदमी पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए पहले ही उम्मीदवारों का चयन कर लिया है।
बिन्नी ने कथित तौर पर कहा कि वह सबसे पहले पार्टी से जुड़ने वाले लोगों में थे, जब आम आदमी पार्टी के पास कोई सपोर्ट नहीं था। और जब पार्टी अपने सिद्धांतों से डोल रही है, तो भी उन्होंने सबसे पहले विरोध जताया है।
उन्होंने कहा, "उन्होंने लोगों से मुफ्त पानी और बिजली को लेकर झूठे वादे किए। जो फैसले और नियम पानी-बिजली पर लाए गए, उससे लोगों में भ्रम पैदा हुआ है।"
'जन लोकपाल बिल पर भी बोला झूठ'
अरविंद केजरीवाल सरकार पर हमला बोलते वक्त बिन्नी ने कोई संयम नहीं दिखाया। उन्होंने कहा, "उन्होंने यह भी कहा था कि सत्ता में आने के 15 दिन के भीतर जन लोकपाल बिल लागू कर दिया जाएगा, लेकिन इसके बारे में भी कुछ नहीं किया गया।"
उन्होंने कहा, "उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कमांडो फोर्स बनाने का वादा किया था, लेकिन बीते कुछ दिनों में महिलाओं के खिलाफ कितने सारे मामले दर्ज किए गए हैं।"
बिन्नी बोले कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे, लेकिन इसे लेकर भी कुछ नहीं किया गया।
बिन्नी की बात पर केजरीवाल का पलटवार
बिन्नी की टिप्पणियों और हमलों का जवाब देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह सरकार बचाने की राजनीति करने नहीं आए और किसी भी सरकार ने एक महीने में इतना काम नहीं किया, जितना उन्होंने कर दिखाया है।
केजरीवाल ने कहा, "उन्हें (बिन्नी) जो करना है, कर सकता है, लेकिन हमें यह वाली राजनीति नहीं करनी। किसी भी सरकार ने इतना काम नहीं किया, जितना हमें एक महीने में कर दिखाया।"
उन्होंने कहा, "हमें राजधानी में फिलहाल कई चुनौतियों से निपटना है और जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूं दिल्ली सुरक्षित नहीं है, खास तौर से महिलाओं के लिए।"
AAP के खिलाफ खोला मोर्चा
विनोद कुमार बिन्नी इस बात से भी नाराज थे कि आम आदमी पार्टी और दिल्ली के कानून मंत्री ने दिल्ली महिला आयोग का मजाक बनाया और संस्था का अपमान किया।
आम आदमी पार्टी की एक और बागी नेता टीना शर्मा ने भी बिन्नी को समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा, "पार्टी में कोई लोकतंत्र नहीं है। अलग लोगों के लिए अलग पैमाने रखे गए हैं। उन्होंने दिल्ली की जनता को धोखा दिया है और हम चाहते हैं कि लोगों को यह बात पता चले।"
AAP नेता पार्टी और दिल्ली सरकार की काफी वक्त से आलोचना कर रहे हैं। बिन्नी का दावा है कि उन्हें तीन से चार विधायकों का समर्थन हासिल है, जो दिल्ली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हैं।
भाजपा के विधायक भी बैठे धरने पर
बिन्नी की बात पर भाजपा के नेता डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि जो मुद्दे उन्होंने उठाए हैं, उन पर विचार किया जाना चाहिए। सोमनाथ भारती को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हर्षवर्धन ने भाजपा के सभी 32 विधायकों के साथ सचिवालय में धरना दिया और मुख्यमंत्री को अपनी शिकायत सौंपी।
उन्होंने कहा, "जो मुद्दे और सवाल बिन्नी ने उठाए हैं, वे काफी गंभीर हैं। उन्हें निकाला जाना आम आदमी पार्टी का आंतरिक मामला है। मैं यह भी जानना चाहता हूं कि जिस तरह पार्टी के कार्यकर्ता और केजरीवाल ने अपने मंत्री को बचाने के लिए प्रदर्शन किया, वैसा बलात्कार के मामलों में क्यों नहीं हुआ?"
जब भाजपा विधायक धरना दे रहे थे, तो कुछ देर के लिए केजरीवाल अपने कक्ष से बाहर निकले और उनसे मुलाकात की। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ज्ञापन स्वीकार किया और भाजपा विधायकों को चाय देने के लिए कहा।