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चुनावी चकल्लसः बिन्नी तूने ये क्या किया?

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आप के लिए अपने विधायक बिन्नी को संभाल पाना मुश्किल हो रहा है। इतना तो आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी समझ गए हैं। वरना उनकी पहली बगावत को तो पार्टी की आपसी बात कहकर दबाने की कोशिश की गई थी। तब अगले दिन प्रेस कांफ्रेंस करके खुलासा करने की चेतावनी देने वाले बिन्नी रात ग्यारह बजे तक शांत हो गए थे। तब यही लगा कि किसी तरह लोकसभा के टिकट या विधानसभा की अध्यक्षता के आश्वासन पर शायद उन्हें मना लिया गया हो।
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लेकिन बिन्नी ने फिर बगावती आवाज उठाई तो इस बार आप ने उनको ज्यादा तवज्जो देने की कोशिश नहीं की। यहां तक कि केजरीवाल कह रहे हैं कि वो लोकसभा टिकट चाहते हैं, यह आप की लोकसभा तो लेकर बन रही रणनीति में किसी विधायक को टिकट देने का विचार नहीं है। यानी बिन्नी के लिए पार्लियामेंट में जाने का कोई चांस नहीं। मगर बिन्नी बता रहे हैं कि उन्हें लोकसभा का मोह नहीं। वो तो पार्टी को गलत दिशा में जाने से रोक रहे हैं।

पीछे क्यों रहें मटुकनाथ

लव गुरु भला पीछे क्यों रहें। जब सेलिब्रिटी का आप में जाने का सिलसिला चल पड़ा है तो मटुकनाथ के लिए भी तो राह बनती है। आप मत मानिए उन्हें सेलिब्रिटी। लेकिन रेडियो के उस चैनल से पूछिए जिसके स्टूडियो में बैठकर वो और लिव इन रिलेशन में रहने वाली उनकी प्रेमिका तमाम प्रेमी-प्रेमिकाओं को लव करने के टिप्स देते रहे हैं। प्यार करने वाले उनसे हर तरह के सवाल पूछते रहे हैं। प्रेम करने में तमाम अड़चन-बाधाओं के आने पर प्रेमी युगल उनकी शरण में आते हैं।

अपनी बातें कहते हैं, उनके सुझाव लेते हैं। लव गुरु और उनकी प्रेमिका इस विधा में पारंगत है। इसलिए उनकी सलाह ली जाती है। लेकिन मटुकनाथ केवल अपनी प्रेमलीला में नहीं रमना चाहते। उन्हें लगता है कि जिस तरह आप में अलग अलग क्षेत्रों की प्रतिभाएं शामिल हो रही हैं, उसी तरह उन्हें भी आप में शामिल होना चाहिए। केवल शामिल ही नहीं होना चाहिए बल्कि चुनाव भी लड़ लेना चाहिए। अब यह तो आप पार्टी को सोचना है कि रास रचाने वाले मटुकनाथ का सम्मान करती है या तिरस्कार। मटुकनाथ ने तो अपनी इच्छा जता दी है।

राहुल गांधी की कक्षाएं

राहुल गांधी की क्लास में जाने का सौभाग्य किसी-किसी को मिलता है। जिन्हें मिलता है वो पखवाड़े भर इठलाए रहते हैं। वह क्लास लेते हैं और उसे अटैंड करने वाले चुपचाप नोट्स बनाते जाते हैं। कोई इतनी जुर्रत नहीं करता कि कोई प्रश्न करे या दिल में कोई उबाल आ रहा हो तो उसे अभिव्यक्त कर सके। कोई सवाल करना हो तो भी राहुल सर ही करते हैं और उसका उत्तर भी वही देते हैं। राहुल सर की क्लास लगती है तो वो अपने को सौभाग्यशाली समझते हैं जिन्हें इनमें आमंत्रित किया जाता है।

राहुल सर की क्लास का विषय कुछ भी हो सकता है। मसलन लोगों को समझाना है कि इस देश में दो तरह के भारत हैं। कैसे समझाएंगे? या फिर चार राज्यों में कांग्रेस की पराजय के क्या कारण रहे? ​उप्र में पुराने दिन कैसे लौट सकते हैं? ​क्लास में गंभीरता से कहा जा सकता है कि अपने किसी करीबी को टिकट देने के फेर में न रहें, पारदर्शिता बरती जाएगी। क्लास का विषय यह भी हो सकता है कि टिकट बंटेंगे तो यूथ को तरजीह मिलेगी।

और ​क्लास में इस बात पर भी मंथन हो सकता है कि नई नई बनी आप पार्टी कहीं भस्मासुर ना हो जाए? यह भी कि आगे पार्टी अपना माहौल बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठा सकती है। इन कक्षाओं में राहुल सर आर्थिक, सामाजिक हर मसले पर बोल सकते हैं। बस इन क्लास का इस बात पर ध्यान देना होता है कि उसे अटेंड करने वाले कही क्लास की बातों को बाहर न कहें। लेकिन इन क्लास का उन पर इतना असर पड़ता है कि वह गदगद हो जाते हैं। यही कारण है कि क्लास से बाहर आते ही भले ही उनके बयान कुछ भी हों, पर एक ही बात जुबान में रहती है कि क्लास तो राहुल सर ही लेते हैं।
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ये मेरे वतन के लोगों

ये मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी, चीन भारत युद्ध में शहीद हुए लोगों की याद में लताजी ने इस गीत को गाया था। 27 जनवरी को मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स मैदान में फिर यह गीत गूंजेगा। अकेली लताजी नहीं गाएंगी, बल्कि उनके साथ वहां उमड़े हजारों लोग उस गीत को साथ-साथ गाएंगे। लताजी के इस गीत को गाने पर आखिर नया क्या है। लेकिन यह केवल शहीदों को याद करना या उनके परिजनों को आमंत्रित कर उनका सम्मान करना भर नहीं है। शहीद गौरव समिति और लोढ़ा फाउंडेशन के जरिए आयोजित इस आयोजन में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लताजी का सार्वजनिक अभिनंदन होना है।

जाहिर है देश प्रेम से ओतप्रोत बहुत सी बातें वहां कहीं जाएगीं। पिछले दिनों लताजी सार्वजनिक तौर पर अपनी राय जता चुकी हैं कि प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी उनकी पसंद हैं। ऐसे में जब चुनाव की रणभेरी लगभग बजने वाली हो, तब लताजी की इस आयोजन के लिए सहभागिता भाजपा के संदर्भ में अलग महत्व रखती है। बेशक शहीदों को याद किया जाएगा, लेकिन संदेश कुछ और भी है।
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