चारा घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के दोषी साबित होने के बाद बिहार की राजनीति नई करवट लेगी।
राज्य में निकट भविष्य में पुराने राजनीतिक समीकरण टूटने और नए राजनीतिक समीकरण बनने के आसार बनते दिख रहे हैं।
खासकर राजद विरोधी दल जहां लालू की विरासत और वोट बैंक पर कब्जा करने के लिए अपनी ताकत झोंकेंगे।
वहीं खुद राजद इस फैसले के बाद उपजी सहानुभूति के सहारे चुनावी नैया पार लगाने का प्रयास करेगी। इस फैसले के बाद कांग्रेस और जदयू के संबंध और मधुर होने की भी संभावना बनती दिख रही है।
बिहार में भाजपा और जदयू का 17 साल पुराना संबंध टूटने के बाद वहां की राजनीति त्रिकोणीय हो गई है। राज्य में भाजपा और जदयू के बाद राजद अचानक ताकतवर हो कर उभरी है।
बीते दिनों महाराजगंज उपचुनाव में जदयू उम्मीउदवार को करारी शिकस्त दे कर राजद ने इसका अहसास भी कराया था।
अब मौजूदा स्थिति में जदयू अपना पूरा जोर राजद के वोट बैंक में सेंध लगाने और नेताओं को तोड़ने में लगाएगा।
खास बात यह है कि भाजपा से अलग होने के बाद जदयू भी पूरी तरह पिछड़ी, अति पिछड़ी और मुस्लिम वोटों पर निर्भर है, जो कि राजद का भी मुख्य वोट बैंक है।
जदयू की रणनीति कांग्रेस से हाथ मिला कर मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जा करने और राजद नेताओं को तोड़ कर पिछड़ी जाति के वोट बैंक पर कब्जा करने की है।