बिहार के कार्यवाहक मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने हालांकि अपना इस्तीफा शुक्रवार को दिया, मगर इसकी पटकथा बृहस्पतिवार की रात को ही लिख ली गई थी। दरअसल रात्रिभोज में महज 13 विधायक ही जुटा सके मांझी ने संख्या बल जुटाने के मामले में हाथ खड़े कर लिए थे।
इसके बाद भाजपा नेताओं ने उन्हें विश्वास मत हासिल करने से पहले इस्तीफे के लिए मनाया। भाजपा का दावा है कि पूरा घटनाक्रम उसकी रणनीति के अनुरूप ही घटित हुआ और पार्टी अपनी इच्छा के अनुरूप मांझी को इस लड़ाई में शहीद बनाने में कामयाब हो गई।
पार्टी के रणनीतिकारों को एक सप्ताह पहले से ही पता था कि मांझी भाजपा के समर्थन के बावजूद अपनी सरकार बचाने के लिए जरूरी संख्या नहीं जुटा पाएंगे। भाजपा भी अंदरखाने नहीं चाहती थी कि मांझी की सरकार बच जाए। ऐसा होने पर पार्टी को विधानसभा चुनाव तक मांझी का समर्थन करते रहने की मजबूरी से दो-चार होना पड़ता।