‘ताजमहल के पीछे यमुना किनारे जमा कूड़ा-करकट पर बगीचा बनाकर एएसआई ने इसकी नींव में मौजूद साल की लकड़ी की नमी छीन ली है। लगातार सूखने से नींव में मौजूद लकड़ी के बड़े बॉक्स उस दबाव को नहीं झेल पाएंगे जो यमुना नदी में कभी बाढ़ के दौरान आएगा। ताजमहल के लिए यह बड़ा खतरा हो सकता है’।
यह चेतावनी दी है आईआईटी रुड़की के रिटायर्ड प्रो. एससी हांडा ने, जो रविवार को अजूबा ए आगरा कार्यक्रम के जरिए ताजमहल के आर्किटेक्चर को बयां कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सिर्फ ताजमहल की आउटर वॉल तक पानी रहे, सरकार इतना प्रयास कर दे। ताज को यह मिल जाए तो भूकंप के झटकों का भी खतरा नहीं रहेगा।
'लोगों को ताजमहल को बचाने का प्रयास करना चाहिए'
होटल मुगल में आर्किटेक्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित अजूबा ए आगरा का शुभारंभ आकांक्षा समिति अध्यक्ष संगीता भटनागर के साथ प्रो. एससी हांडा ने किया। ताजमहल के बनने से लेकर इसकी बनावट तक की खासियत को प्रो. हांडा ने खूबसूरती से शब्दों में कहानी के रूप में पिरोया।
साल 2003 में आईआईटी रुड़की द्वारा ताजमहल की सॉइल टेस्टिंग करने वाले प्रो. एससी हांडा ने बेहद दुखी अंदाज में कहा कि ताजमहल के पीछे जिन दरवाजों से कभी शहंशाह शाहजहां प्रवेश करता था, वह दरवाजे अब बंद कर दीवार लगा दी गई है। हद ये कि कूड़े के ऊपर बागीचा बनाने से दरवाजे महज दो से तीन फुट तक ही नजर आ रहे हैं। आगरा के लोगों को ताजमहल को बचाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने साल 1907 के ताजमहल की कुंओं की नींव और साल की लकड़ी के बॉक्स का दुर्लभ चित्र भी पेश किया। बैराज का समर्थन करते हुए कहा कि सिर्फ उतना पानी रहे कि ताज की दीवार से सटकर बहता रहे, इससे नींव को मजबूती मिलेगी।
'नींव तक पानी न पहुंचा तो खतरा बढ़ जाएगा'
प्रो. हांडा ने 1979 के बाद से ताजमहल के तमाम हिस्सों को बंद करने पर कहा कि इससे इमारत को नुकसान होगा। दीवारों, बंद कमरों में हवा जानी चाहिए। भूकंप से तो ताजमहल सुरक्षित रहेगा, लेकिन नींव तक पानी न पहुंचा तो खतरा बढ़ जाएगा।
कार्यक्रम में आर्किटेक्ट एसोसिएशन के समीर गुप्ता सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इनमें वाईके गुप्ता, सतीश चंद्र गुप्ता, जेएस फौजदार, सुमित विभव, राजीव सक्सेना, संजय शर्मा, संतोष कटारा, अवनीश कौशल, अनुराग शुक्ला, सुशील गुप्ता, अतुल बंसल आदि मौजूद रहे।