सर, क्या दरोगा की पोस्टिंग का रेट सात लाख रुपया फिक्स कर दूं...? यह एसएमएस है जालसाज सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल का एक तत्कालीन डीजीपी के नाम। अधिकारी ने भी जवाब एसएमएस से ही दिया, हां शैलेंद्र फिक्स कर दो। मतलब साफ है। बोली लगाकर दरोगाओं की पोस्टिंग नीलाम की जा रही थी।
पैसे के लालच में बेईमान हो जाने वाला यह अकेला अधिकारी नहीं है। इससे पहले के एक अन्य डीजीपी के साथ जालसाज शैलेंद्र की एसएमएस के जरिए बातचीत देखिए। सर, डीपीसी के लिए दरोगा चक्कर लगा रहे हैं, क्या लेना है? जवाब मिला, एक का 20 लाख रुपया। इन दो एसएमएस से पता चलता है कि पुलिस में पोस्टिंग से लेकर प्रमोशन तक में किस तरह खुलकर पैसे का खेल चलता है?
फिलहाल रिटायर्ड हो चुके इन दोनों अधिकारियों पर आगरा पुलिस शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शैलेंद्र अग्रवाल की जालसाजी में इनकी भूमिका मालूम करने के लिए जांच शुरू हो चुकी है। इनके खिलाफ सुबूत जुटाने के लिए सीबीआई की तकनीकी शाखा की मदद ली गई। दरअसल, करोड़ों की जालसाजी में एक मई से जिला जेल में बंद सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल के मोबाइल की कॉल डिटेल रिपोर्ट पुलिस निकाल नहीं पा रही थी।