नेपाल पुलिस ने लालकुआं के रहने वाले तीन युवकों को पकड़कर दोनों देशों के बीच हो रहे आर्थिक अपराध और ब्लैकमनी को व्हाइट करने के बडे़ खेल का खुलासा किया है।
नैनीताल पुलिस और एसटीएफ भी मामले की जांच में जुट गई है। जांच में मनी लांड्रिग और यारसागंबू की तस्करी को भी बिंदु बनाया गया है। कुछ ही समय में तीनों युवकों के करोड़पति बन जाने की भी अन्य विभागों ने जांच शुरू कर दी है।
नेपाल पुलिस ने 25 मार्च को तीनों युवकों को महेंद्रनगर से गिरफ्तार किया था। इनसे 20 इंटरनेशनल बैंकों सहित 40 एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं। इस नेवटर्क के चीन से जुड़े होने की आशंका भी पुलिस जता रही है।
समझा जाता है कि ये काला पैसा नेपाल के बैंकों और वहां से चीन के बैंकों जमा करने का धंधा है। पैसा इधर-उधर करने में उद्योगपतियों, नेताओं और ठेकेदारों के शामिल होने का शक है।
पुलिस ने तीनों युवकों को जिस कार से पकड़ा वह भी नैनीताल के नंबर की है। पिछले तीन दिनों से इनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।
पूछताछ में पता चला है कि तीनों यहां से कई खातों में रुपया जमा करवाते थे। जिसके बाद उन्हें नेपाल में एटीएम का प्रयोग कर के निकाल लिया जाता था। एक लाख रुपये ट्रांसफर करने के बदले उन्हें 10 हजार रुपये कमीशन मिलता था। इस तरह इन तीनों ने काफी जल्द काफी रुपया और प्रॉपर्टी जोड़ ली।
आरोपियों की पहचान लालकुआं निवासी मोहन बिष्ट, सुरेंद्र बिष्ट और हल्दूचौड़ निवासी चंद्र सिंह के रूप में हुई। इन्होंने पूछताछ में बताया कि इनको सारे एटीएम कार्ड किसी व्यक्ति ने दिए थे। ये व्यक्ति फोन पर ही हिदायत देता था कि कब कब कितने रुपये निकालने हैं।
पूछताछ में पता चला है कि वह व्यक्ति कुमाऊं क्षेत्र का ही है। तीनों के पास मिले मोबाइल फोन के जरिये भी नेपाल पुलिस इस खेल के असली खिलाड़ी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। इनके पास जो एटीएम मिले हैं उनमें से आठ एक बड़े भारतीय राष्ट्रीयकृत बैंक के हैं। करोड़ों रुपये ये अब तक इन एटीएम के जरिये भारत से नेपाल पहुंचा चुके हैं।
बड़ा नेटवर्क कर रहा है काम
तीनों युवकों के पकड़े जाने के बाद नेपाल पुलिस ने संपर्क किया था। उनसे सारी जानकारियां लेकर हमने जांच शुरू कर दी है। मामला दो देशों के बीच आर्थिक अपराध और ब्लैकमनी से जुड़ा है। कुछ ही समय में तीनों के पास काफी पैसा आ गया। इसकी भी जांच हो रही है। अगर पैसा अपराध के जरिये कमाया गया निकला तो उसे जब्त किया जाएगा। मामले में साइबर एक्सपर्ट भी लगा दिए गए हैं। इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
- संजय गुंज्याल, डीआईजी नैनीताल