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सुप्रीम कोर्ट: जज ही करेंगे जजों की नियुक्ति

Fri, 16 Oct 2015 04:56 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने NJAC (राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग) को खारिज कर दिया है, जिसके बाद यह तय हो गया है कि जज ही जजों की नियुक्ति करेंगे।
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संविधान पीठ ने NJAC को असंवैधानिक बताते हिुए कहा कि इस माध्यम से जजों की नियुक्ति नहीं की जा सकती क्योंकि ये संविधान की मूल भावना, न्यायपालिका की आजादी के खिलाफ है।

बताते चलें कि सरकार जजों की नियुक्ति के संबंध में कॉलेजियम प्रणाली समाप्त करने के लिए 99वां संविधान संशोधन लायी थी, जिसे सर्वाेच्च न्यायालय के 5 न्यायधीशों की संविधान पीठ ने खारिज कर दिया था।
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99वां संविधान संशोधन असंवैधानिक घोषित होने के बाद पुरानी कॉलेजियम प्रणाली बहाल हो गई है। कोर्ट ने कहा कि NJAC संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

केंद्र ने किया था बचाव

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस नए कानून को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एशोसिएसन द्वारा कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि यह कानून असंवैधानिक और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को चोट पहुंचाने के उद्देश्य से लाया गया है।

वहीं केंद्र सरकार की दलील थी कि बीते दो दशकों से चली आ रही कॉलेजियम प्रणाली में कई दोष हैं जिस पर उसे सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन का समर्थन भी मिला था।

केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह नया कानून 20 राज्यों द्वारा भी समर्थित किया गया था। केंद्र सरकार के नए कानून का विरोध वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी ने भी किया था।

ये है कॉलेजियम प्रणाली

बताते चलें कि कॉलेजियम सिस्टम 1993 से चला आ रहा है। इसके अंतर्गत जजों की नियुक्ति और तबादले किए जाते थे। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और 4 अन्य वरिष्ठ जज शामिल होते हैं।

कॉलेजियम प्रणाली की सबसे अहम बात यह है कि इसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका के लोग ही करते है। दुनिया में भारत ही एक ऐसा मुल्क है जिसमें ऐसी प्रणाली है जिसमें न्यायपालिका ही न्यायाधीशों की नियुक्ति करती है।

कॉलेजियम प्रणाली के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय का  कॉलेजियम नामों की सिफारिश करता है। सरकार कॉलेजियम द्वारा सुझाए गए किसी नाम पर विचार करने को कह सकती है लेकिन अगर कॉलेजियम ने वही नाम दोबारा आगे बढ़ा दिया तो उसे सरकार को मानना ही होगा।
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इसलिए करते हैं कॉलेजियम का विरोध

वहीं कॉलेजियम प्रणाली का विरोध करने वालों का कहना है कि इसमें पारदर्शिता की कमी है और उनके द्वारा लिए गए फैसलों के आधार का पता नहीं चलता।

उनका ये भी मानना है कि इस प्रणाली के वजह से कई काबिल न्यायाधीशों का प्रमोशन नहीं हो पाता। कॉलेजियम प्रणाली का विरोध करने वालों के अनुसार इसके अंतर्गत की जाने वाली नियुक्तियों की बैकग्राउंड की जांच नहीं की जाती।

केंद्र सरकार ने बीते 14 अगस्त को राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक को पारित किया। इसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के जजों की नियुक्ति की सिफारिश करने के लिए आयोग गठित करने का प्रावधान है।

इसके अंतर्गत कुल 6 सदस्य थे, जिसमें मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठ न्यायाधीश, केंद्रीय कानू मंत्री और दो अन्य लोग शामिल होंगे जिनका चयन प्रधानमंत्री , मुख्य न्यायाधीश और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष वाली तीन सदस्यीय समिति करेगी।
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