सियासत है अजीब शतरंज, यहां वजीर को मोहरा मारता है... । यह शेर एकदम सटीक बैठता है दिल्ली के पूर्व विधायक रामवीर शौकीन पर। जिस भूरा को शौकीन का एक मोहरा माना जा रहा था, चालबाजी में वो उस्तादों का उस्ताद निकला।
शौकीन सोच रहा होगा कि देहरादून पुलिस से बागपत में लुटे असलाह भूरा के पास से मिलेंगे, लेकिन कहानी एकदम बदल गई। एक एके-47 और एक एसएलआर उसके भांजे नीरज बवाना की निशानदेही पर मिली। वो भी शौकीन के प्लॉट से। भूरा बच गया। मामा और भांजे दोनों फंस गए।
पुलिस सूत्रों की मानें तो इन असलाह की रिकवरी पूर्व विधायक पर दबाव बनाने के बाद ही हुई थी। चर्चा तो यहां तक चली थी कि शौकीन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए असलाह चुपचाप पुलिस के पास पहुंचवा दिए। शायद उसने सोचा होगा कि जब भूरा पकड़ा जाएगा, तो पुलिस रिकवरी उसके पास से दिखाएगी, लेकिन चाल उल्टी पड़ गई।
भूरा दिल्ली के बजाय पकड़ा गया पंजाब के पटियाला से। पुलिस सूत्रों की मानें तो दिल्ली पुलिस ने जितनी सख्ती नीरज और शौकीन पर दिखाई है, भूरा पर उतनी ही नरमी रही है। गौरतलब है भूरा दिल्ली पुलिस का मुखबिर रहा है।