केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि मौत की सजा पाने वाले खालिस्तानी आतंकी देविंदर पाल सिंह भुल्लर के मृत्युदंड को लागू नहीं किया जाएगा।
साथ ही कहा कि सरकार उसके पक्ष में चिकित्सकीय आधार पर दायर की गई नई दया याचिका की जांच कर रही है।
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार दया याचिका पर जल्द निर्णय ले क्योंकि हरेक दिन का विलंब दोषी के लिए प्रताड़ना है।
पीठ ने सरकार को दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया और भुल्लर की पत्नी नवनीत कौर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई को दस मार्च तक के लिए टाल दिया।
कौर ने भुल्लर की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग की थी। इससे पहले अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने अदालत को सूचित किया कि दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग की ओर से भेजी गई रिपोर्ट भी भुल्लर के मृत्युदंड को लागू किए जाने के पक्ष में नहीं है।
पीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा कि उपराज्यपाल की ओर से भेजी गई रिपोर्ट नैसर्गिक न्याय और मानव नीति के सिद्धांतों पर आधारित है। भुल्लर की पत्नी की ओर से दायर की गई दया याचिका को अस्वीकार करने की सिफारिश हमारी ओर से नहीं की जा सकती और सरकार सिर्फ इसमें अपनी टिप्पणियां ही राष्ट्रपति को आगे बढ़ा सकती है, जो दया याचिका पर अंतिम निर्णय लेंगे।
याद रहे कि शीर्षस्थ अदालत ने 31 जनवरी को भुल्लर की मौत की सजा को लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी। दिल्ली सरकार ने हाल ही में हलफनामा दायर कर कहा था कि भुल्लर की मानसिक बीमारी को ध्यान में रखते हुए उसके खिलाफ मौत की सजा को लागू नहीं काराया जा सकता।
चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली सरकार ने कहा था कि भुल्लर गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है। ऐसे में उसे फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है।