प्रख्यात रसायन विज्ञानी प्रोफेसर सीएनआर राव को देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न के लिए चुना गया है। मुखर वैज्ञानिक प्रोफेसर चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव को दुनिया भर में सॉलिड स्टेट और मैटेरियल केमिस्ट्री में उनकी विशेषज्ञता की वजह से जाना जाता है।
लगभग 1400 शोध पत्र और 45 किताबें लिख चुके प्रोफेसर राव का नाम दुनिया भर की विज्ञान अकादमियों में ब़ड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रोफेसर राव सीवी रमन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के बाद तीसरे वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भारत रत्न से नवाजा जाएगा।
रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के लिए दुनिया भर की विज्ञान अकादमियों में उनकी पहचान है और ज्यादातर उन्हें अपनी सदस्यता और फेलोशिप से नवाज चुके हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
डॉ. राव न सिर्फ न केवल बेहतरीन रसायनशास्त्री हैं बल्कि उन्होंने देश की वैज्ञानिक नीतियों को बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। इस समय डॉ. राव प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष हैं।
वह सन 1985 में पहली बार और सन 2005 में दूसरी बार इस समिति के अध्यक्ष चुने जा चुके हैं। उन्होंने पदार्थ के गुणों और उनकी आणविक संरचना के बीच बुनियादी समझ विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।
सन 1964 में उन्हें इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज का सदस्य नामित किया गया। सन 1967 में फैराडे सोसाइटी ऑफ इंग्लैंड ने राव को मार्लो मेडल दिया। सन 1968 में राव भटनागर अवार्ड से नवाजे गए।
सन 1988 में जवाहरलाल नेहरू अवार्ड और सन 1999 में वह इंडियन साइंस कांग्रेस के शताब्दी पुरस्कार से सम्मानित हुए। भारत सरकार ने उन्हें 1974 में पदमश्री और 1985 में पदमविभूषण से सम्मानित किया। डॉ. राव को कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक रत्न की उपाधि दी है।
डॉ. राव का जन्म 30 जून 1934 को बंगलुरू में हुआ। वह अपने माता पिता की इकलौती संतान हैं। स्कूली दिनों से ही उनका रुझान रसायनशास्त्र की ओर हो गया और इसी को उन्होंने कैरियर के रूप में अपनाया।
सन 1947 में राव ने अपनी हाईस्कूल परीक्षा पास की और विज्ञान में गहरी रुचि के कारण सेंट्रल कॉलेज बंगलुरू में दाखिला लिया। सिर्फ 17 की उम्र में ही बीएससी परीक्षा पास कर उन्होंने सबको चौंका दिया।
बीएससी के बाद एमएससी के दौरान उन्हें रसायनज्ञ पलिंग की पुस्तक, नेचर अफ दी केमिकल बांड को पहली बार पढ़ने का मौका मिला। इस पुस्तक ने राव के मन में अणुओं के संसार के प्रति गहरी उत्सुकता जगा दी।
प्रसिद्धि की वजह
प्रोफेसर राव सॉलिड स्टेट और मैटेरियल केमिस्ट्री में अपनी विशेषज्ञता की वजह से जाने जाते हैं। उन्होंने पदार्थ के गुणों और उनकी आणविक संरचना के बीच बुनियादी समझ विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।
क्या है उपलब्धियां
50 से अधिक वर्षों से रिसर्च में जुटे हैं1400 शोध पत्र और 45 किताबें प्रकाशितकई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानितनामी विश्वविद्यालयों और विज्ञान अकादमियों की सदस्यता और फेलोशिप1974 में पद्म श्री और 1985 में पद्म विभूषण से सम्मानितइंटरनेशनल सेंटर ऑफ मैटिरियल साइंस के निदेशक रहेलिनस पलिंग प्रोफेसर के तौर पर सम्मानितभारत रत्न मेरे लिए कंपलीट सरप्राइज : राव
बंगलुरू। भारत रत्न की घोषणा सीएनआर राव के लिए चौंकाने वाली थी। उन्होंने इसकी उम्मीद नहीं की थी। राव ने इसकी घोषणा सुनने के बाद कहा कि यह मेरे लिए कंपलीट सरप्राइज है। मैं यह पुरस्कार अपनी पत्नी, परिवार, अपने बच्चों और छात्र-छात्राओं को समर्पित करता हूं। मैं हवाईअड्डे पर था। उसी समय इंडिगो एयरलाइंस के एक कर्मचारी ने आकर मुझसे कहा, आपके लिए अर्जेंट क़ॉल है। यह भारत रत्न मिलने की सूचना थी।
राव ने बंगलुरू हवाईअड्डे पर पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें फोन कर भारत रत्न के लिए चुने जाने की बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा, आपने देश और विज्ञान के लिए काफी काम किया है। राव ने कहा कि उन्होंने विज्ञान और देश के लिए 54 साल तक काम किया है और एक भारतीय होने का उन्हें गर्व है। अगर मुझे भारतीय होने का गर्व नहीं होता तो मैं कहीं और होता। मेरे लिए भारत रत्न बिल्कुल चौंकाने वाला है।
राव के पास दुनिया भर के विश्वविद्यालयों की 60 मानद पीएचडी डिग्रियां हैं और भारतीय वैज्ञानिक समुदाय में वह एक आइकन की तरह देखे जाते हैं। क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर को भी भारत रत्न दिए जाने के ऐलान पर उन्होंने कहा कि इसकी सूचना उन्हें पत्नी ने दी। उन्होंने कहा कि सचिन महान खिलाड़ी हैं। राव ने कहा, मैं मैसूर का रहने वाला हैं। मैं एक वैज्ञानिक को यह सम्मान दिए जाने का आभारी हूं।