जाने-माने मराठी लेखक भालचंद्र नेमाडे को ज्ञानपीठ पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। नेमाडे एक उपन्यासकार, कवि और समीक्षक के रूप में देश भर में विख्यात हैं।
उन्होंने 1963 में 25 वर्ष की उम्र में ही अपना पहला उपन्यास कोसला लिखा था। कोसला के बाद नेमाडे के चार उपन्यास प्रकाशित हुए। चारों उपन्यास-बिढ़ाल, हूर, जरीला और झूल- ने भी साहित्य जगत में लोकप्रियता पाई।
नेमाडे ने मेलडी और देखणी कविता के जरिए भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उन्होंने टीकास्वयंवर, साहित्याची भाषा और तुकाराम के जरिए आलोचना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1999 में उनकी टीकास्वयंवर इस कृती के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार की स्थापना टाइम्स ऑफ इंडिया परिवार की ओर से दिया जाता है। 1961 में पुरस्कार की स्थापना की गई और पहला पुरस्कार मलयाली भाषा के लेखक जी शंकर कुरूप को मिला था।
हिंदी में ये पुरस्कार सुमित्रानंदन पंत, रामधानी सिंह दिनकर, अज्ञेय, महादेवी वर्मा, नरेश मेहता, निर्मल वर्मा, कुंवर नारयण, अमरकांत, श्रीलाल शुक्ल और केदारनाथ सिंह को मिल चुका है।