बीजेपी के मातृत्व संगठन के रूप में पहचान रखने वाले राष्ट्रीय स्वंयसेवक संगठन के मुखिया मोहन भागवत ने कहा कि वह नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार और अगर उनकी सरकार बनती है तो भी वे ड्राइवर की पीछे वाली सीट पर ही बैठेंगे।
उद्योगपतियों, रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स, सुरक्षा कर्मचारियों, पूर्व खुफिया प्रमुखों और लेखकों से बात करते हुए भागवत ने कहा कि हम पूरे देश में घूम-घूम कर लोगों से बात कर रहे हैं। हमारा काम है मोदी तक उन बातों को पहुंचाना है ना कि नीतियों का निर्धारण करना। नीतियां बनाने का काम चुने हुए लोग ही करेंगे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और एफडीआई का विरोध नहीं करती लेकिन छोटे घरेलू निर्माताओं की कीमत पर हम विदेशी निवेश को बढ़ावा नहीं दे सकते।
मोहन भागवत ने कहा कि हमारे पास विजन है लेकिन विश्व में हो रहे बदलावों को हमें स्वीकार करना होगा। हम भी बदलते समय के साथ बदल रहे हैं लेकिन संतुलन एक जरूरी चीज है। एफडीआई कुछ सेक्टर के लिए ठीक है लेकिन इससे हम छोटे उद्योगों को क्यों मारें? अगर छोटे उद्योगों से हमारा काम चल रहा है तो बड़े उद्योगों की क्या जरूरत है?
भागवत ने शिक्षा में एफडीआई का विरोध किया और कहा कि हमें शिक्षा जैसी चीज को व्यवसाय का रूप नहीं बनने देना चाहिए। विदेशी विश्वविद्यालय हमारे यहां केवल डॉलर कमाने के लिए आते हैं। संस्कार के बगैर शिक्षा बेकार है। हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ना होगा ना कि पश्चिमी देशों के पीछे अंधदौड़ में लगना चाहिए।