टेंपो चालक पिता के लिए पांच बच्चों का परिवार पालना बेहद मुश्किल हो रहा था। उन्हें बार-बार यह चिंता सता रही थी कि बेटा बड़ा होता तो उनकी आर्थिक परेशानियां दूर हो जातीं लेकिन अब उनका यह भ्रम टूट चुका है।
आज वो बड़े गर्व से कहते हैं कि मेरे लिए मेरी बेटियां ही सब कुछ हैं। उनके बिना मैं आज इस मुकाम तक न पहुंच पाता। उनकी इस सोच को बदला है बड़ी बेटी पूजा ने।
उसने न केवल खुद एम.काम तक पढ़ाई की बल्कि परिवार का हाथ बंटाने के लिए कंप्यूटर इंस्टीट्यूट और कोचिंग सेंटर भी खोल दिया। पूजा की देखादेखी छोटी दो बहनें भी परिवार का सहारा बन गईं हैं। तीनों बहनें मिलकर घर का खर्च तो चलाती ही हैं, अपने दो भाइयों को भी पढ़ा रही हैं।
ज्ञानपुर से सटे कांवल गांव निवासी टेंपो चालक अमृत लाल जायसवाल ने पत्नी पुष्पा देवी के साथ करीब चार साल पूर्व ज्ञानपुर के दुर्गागंज तिराहे पर एक कमरा किराये पर लिया।
अमृत लाल को तीन बड़ी बेटियों के अलावा दो बेटे भी हैं। टैंपो से होने वाली मामूली आय से उनके लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल होने लगा। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती देख बड़ी बेटी पूजा ने पिता के कदम से कदम मिलाकर चलना शुरू कर दिया। केएनपीजी से एम.काम कर चुकी पूजा ने पिता का हाथ बंटाने के लिए कंप्यूटर इंस्टीट्यूट और कोचिंग सेंटर खोला।
बड़ी बहन की लगन को देखते हुए छोटी बहनें माला और ज्योति भी उसके साथ जुड़ गईं। आज तीनों बहनें पिता और परिवार का सहारा बन गईं हैं। तीनों कंप्यूटर इंस्टीट्यूट और कोचिंग सेंटर के माध्यम से अच्छी कमाई कर रही हैं। साथ ही घर-गृहस्थी के कार्यों में पूरा सहयोग करती हैं।
उन्हीं की मेहनत से भाई सूरज बीएचयू से बीकाम कर रहा है, जबकि छोटा भाई विष्णु भी पढ़ाई कर रहा है। जहां तक माला और ज्योति की बात है तो दोनों केएनपीजी से बीकाम की पढ़ाई कर रही हैं।
बेटियों के लगन और मेहनत से बेहद खुश अमृत लाल कहते हैं मेरी बेटियां किसी बेटे से कम नहीं। उन्हीं की मेहनत से मेरा बेटा बीएचयू से पढ़ाई कर पा रहा है।
महंगाई के इस दौर में एक टैंपो चालक के लिए परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल था, लेकिन बेटियों की बदौलत मेरे परिवार की स्थिति दिन-प्रतिदिन बेहतर होती जा रही है।