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हर तरफ से उठी 'बेटी के हक' में आवाज

Wed, 22 Jan 2014 11:32 AM IST
अमर उजाला, झांसी
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अमर उजाला के बेटी ही बचाएगी अभियान से हर रोज नए लोग जुड़ते जा रहे हैं। इस अनूठी मुहिम को सभी वर्ग और उम्र के लोग अपना समर्थन दे रहे हैं। वे खुद तो बेटी बचाने का संकल्प ले ही रहे हैं साथ ही औरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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बीकेडी में बेटी के हक में हुई शपथ
अमर उजाला की अनूठी पहल 'बेटी ही बचाएगी' अभियान के तहत मंगलवार को बुंदेलखंड महाविद्यालय में शिक्षकों व छात्र - छात्राओं ने बेटी के हक में शपथ ली। इस अवसर पर सभी ने एक स्वर में बेटी को समाज की धुरी बताया।

बेटी ही बचाएगी अभियान के प्रति लोगों में उत्साह का माहौल बना हुआ है। मंगलवार को अमर उजाला की इस अनूठी पहल का हिस्सा बना बुंदेलखंड महाविद्यालय।

यहां आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य डा. श्रीकांत यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बेटी को हमेशा से ही सर्वोच्च स्थान दिया गया है, परंतु जागरूकता के अभाव में बेटियां उपेक्षित हैं। बेटियों को बचाने में अमर उजाला का यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा।
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विद्यार्थियों के साथ प्रोफेसर भी बोले 'बेटी ही बचाएगी'
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक - शिक्षिकाएं भी अमर उजाला के 'बेटी ही बचाएगी' अभियान का हिस्सा बने। उन्होंने शपथ ली कि बेटियों को बराबरी का दर्जा देने के साथ ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

बेटियों को भी है जीने का पूरा अधिकार
बेटियों को भी जीने का पूरा अधिकार है। बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना होगा, ताकि वे शिक्षित होकर अपनी किस्मत खुद लिख सकें।

अमर उजाला के बेटी ही बचाएगी अभियान के तहत मंगलवार को बेटी के हक में शपथ लेते हुए यह विचार जेसीआई झांसी वीरांगना जेसीज की सदस्याओं ने व्यक्त किए।

स्थानीय होटल में आयोजित जेसीआई झांसी वीरांगना जेसीज के द्वितीय अधिष्ठपान समारोह में बेटी ही बचाएगी अभियान का संकल्प पत्र भरते हुए समाज सेविका डा. नीति शास्त्री ने कहा कि अपने अधिकारों को पाने के लिए बेटियों को और जागरूक होना होगा। तभी वे अपनी किस्मत खुद लिख सकेंगी।

अध्याय अध्यक्ष हेमा पालरवाले ने कहा कि बेटी ही भविष्य है, बिना बेटी के समाज की कल्पना करना व्यर्थ है। समाज के प्रत्येक क्षेत्र में लड़कियों ने अपनी भूमिका सिद्ध की है। अध्याय सचिव अपर्णा दुबे ने कहा कि प्रत्येक कामयाब पुरुष के पीछे किसी न किसी महिला का ही हाथ होता है।

सभी महापुरुषों ने अपनी आत्मकथाओं में यह स्पष्ट लिखा है। विनीता अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को शत प्रतिशत शिक्षित करना आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की कम उम्र में ही शादी कर दी जाती है जबकि, वे शादी के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होती हैं।

निधि साहनी व गीता गुप्ता ने कहा कि आज के युग में महिलाओं को भी अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए जागरूक होना चाहिए। वह महिलाएं जो बेटा बेटी में भेद रखती हैं, उन्हें इस अंतर को खत्म करना होगा।

पूनम अग्रवाल के मुताबिक आत्मनिर्भर होने पर ही बेटियों की सामाजिक दशा में परिवर्तन आएगा। लड़कियों को व्यवसायिक शिक्षा एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी देना आवश्यक है।
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