केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा और उनके दोस्त से दुश्मन बने मुलायम सिंह यादव के बीच छत्तीस का आंकड़ा है, इससे सभी वाकिफ हैं। लेकिन अब बेनी को अपने 'पसंदीदा' विरोधी पर हमला बोलने का लाइसेंस मिल गया है।
दरअसल, कांग्रेस को अब संसद में समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम की खास जरूरत नहीं है और इसलिए उनका मूड अच्छा रखने का कोई दबाव भी नहीं है।
कांग्रेस के एक मैनेजर ने बताया कि मुलायम के खिलाफ आग उगलने से वर्मा को रोकने की कोई वजह या जरूरत नहीं है। पिछले हफ्ते उन्होंने सपा प्रमुख पर भाजपा से साठगांठ कर उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे भड़काने का आरोप लगाया था।
कांग्रेस केवल इस बात से चिंतित है कि वर्मा अपनी पार्टी और अपने नेताओं के खिलाफ कोई बयानबाजी न करे। पार्टी मैनेजर ने कहा, "जब तक वह कांग्रेस या उसके नेतृत्व की आलोचना नहीं करते, तब तक सब सही है।"
यह प्रतिक्रिया कुछ अलग है, क्योंकि कांग्रेस को बार-बार वर्मा पर लगाम लगाने की जरूरत पड़ी है। एक बार उन्होंने यहां तक कह दिया था कि यादव ने यूपीए का समर्थन करने के लिए पैसा लिया है और उनके आतंकियों से रिश्ते हैं।
कांग्रेस ने बजट सत्र के दौरान इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उसने वर्मा को अपने टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उन्होंने अपना रुख नहीं बदला, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।