यूपीए सरकार से तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापसी की आंच पश्चिम बंगाल के स्पेशल पैकेज पर पड़ सकती है। करीब 2.26 लाख करोड़ रुपये के कर्ज से दबे बंगाल को केंद्र की ओर से 16 हजार करोड़ का विशेष आर्थिक पैकेज देने की तैयारी चल रही थी। इसे अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम गत मंगलवार को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा से मिलने वाले थे, लेकिन मित्रा नहीं पहुंचे। इसी बीच ममता बनर्जी ने सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया था।
पश्चिम बंगाल पर कर्ज का बोझ बढ़ते-बढ़ते करीब 2.26 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। बंगाल सर्वाधिक कर्ज लेने वाला राज्य है। यही वजह है कि बंगाल के लिए ममता बनर्जी पिछले डेढ़ साल से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग कर रही थीं। प्रणब मुखर्जी के वित्त मंत्री रहने के दौरान बंगाल को विशेष पैकेज देने की तैयारी शुरू हुई थी। राष्ट्रपति चुनाव में भी ममता बनर्जी केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता के आश्वासन के बाद ही यूपीए के पक्ष में आई थीं।
यूपीए सरकार और तृणमूल कांग्रेस का नाता टूटने के विशेष पैकेज का भविष्य भी अधर में लटकता दिख रहा है। पश्चिम बंगाल ने करीब 20 हजार करोड़ का कर्ज मार्केट लोन के तौर पर लिया हुआ है जबकि एफआरबीएम एक्ट के तहत उसे अधिकतम 17 हजार 828 करोड़ रुपये का कर्ज मिल सकता था। केंद्र सरकार को समर्थन देने के एवज में तृणमूल कांग्रेस इस तरह की छूट लेती रही हैं। अपने खर्चों को पूरा करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की कर्ज पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। स्टेट डेवलपमेंट लोन के जरिए भी बंगाल सबसे ज्यादा 10 हजार करोड़ रुपये लेने वाला राज्य है।