वैज्ञानिक ऐसा पेसमेकर विकसित कर रहे हैं जो बैटरी रहित होगा और जिस दिल में लगेगा उसकी धड़कन से चार्ज होगा। यह प्रगति पीजोइलेक्ट्रिकल सिस्टम पर आधारित है, जिसमें पेसमेकर धड़कन के वाइब्रेशन को विद्युत ऊर्जा में बदलने की क्षमता रखता है। जिससे पेसमेकर को जरूरी ऊर्जा मिल जाएगी।
बफेलो स्कूल इंजीनियरिंग एंड अप्लाइड साइंस में मकेनिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर और शोध के नेतृत्वकर्ता आमीन करामी के मुताबिक, हम ऐसी तकनीक बना रहे हैं, जिसमें जिस दिल में पेसमेकर लगाया जाएगा उसी से नियंत्रित होगा।