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बटला हाउस एनकाउंटर का आजमगढ़ कनेक्शन

Thu, 25 Jul 2013 04:22 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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शहजाद अहमद को साकेत कोर्ट की ओर से दोषी ठहराए जाने के बाद गुरुवार को बटला एनकाउंटर मामला एक बार फिर गर्मा गया।
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इस मामले की अहम कड़ी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ शहर से जुड़ी है।

दरअसल, मामले में दोषी करार शहजाद आजमगढ़ का रहने वाला है। उसे 2010 में गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद सियासत भी गर्मा गई थी।

दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आजमगढ़ का दौरा किया था और कुछ विवादित बयान दिए थे। जिसमें कहा गया था कि दिल्ली पुलिस जानबूझकर आजमगढ़ को बदनाम कर रही है।

पढ़ें:- बटला हाउस: एमसी शर्मा की हत्या के लिए शहजाद दोषी

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी भी शहजाद के घर गए थे। वहां उन्होंने कांग्रेसनीत यूपीए सरकार पर स्थानीय नौजवानों को सीरियल ब्लास्ट मामले में फंसाने का आरोप लगाया था।
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दिल्ली पुलिस की टीम जब शहजाद को गिरफ्तार करने आजमगढ़ गई थी, तो लौटते वक्त हेड कॉन्सटेबल राजबीर सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

पढ़ें:- बटला एनकाउंटरः क्या-क्या हुआ उस रोज?

इस बीच गुरुवार को अदालत का फैसला आने के बाद शहजाद का परिवार दुखी है। उसके दादा इफ्तिखार ने कहा, 'दुख की बात है यह। इंसाफ अल्लाह के हाथ है। आगे देखिए क्या होता है। हमारे वकील कोर्ट को शायद अपनी बात नहीं समझा सके। वह बेकसूर है। आगे फैसला हमारे हक में आएगा।'

बचाव पक्ष के वकील एस कमर का कहना है, 'हम अपील करेंगे। उम्मीद है ऊपरी अदालत से इंसाफ मिलेगा। शहजाद एनकाउंटर के वक्त वहां मौजूद ही नहीं था।'

मुठभेड़ का मूक गवाह है फ्लैट

बटला हाउस की खलीलुल्लाह मस्जिद के पास है वह चार मंजिला इमारत, जिसके फ्लैट संख्या एल-18 में पांच साल पहले 19 सितंबर 2008 को पुलिस और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।

आतंकियों की तलाश में पहुंची पुलिस ने गोली चलने के बाद फ्लैट नंबर एल-18 को घेर लिया था। भारी पुलिस बल और गाड़ियों के सायरन से बटला हाउस के लोग सहम गए थे।
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यह क्षेत्र उस दिन गोलियों की आवाज से गूंजा था। मामले के पांच साल बाद गोलियों की आवाज तेज भागती जिंदगी के शोर में दब गई है लेकिन फ्लैट एल-18 आज भी उस एनकाउंटर का मूक गवाह बना हुआ है। इमारत के सभी फ्लैट में परिवार रहते हैं, जबकि एल-18 सील पड़ा है।
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