राजस्थान में टोंक जिले के निवई में स्थित प्रसिद्ध वनस्थली विद्यापीठ में छात्राओं के साथ कथित दुष्कर्म एवं प्रताड़ित करने के मामले में राज्य महिला आयोग ने रविवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंप दी है। आयोग की अध्यक्ष प्रोफेसर लाड कुमारी जैन ने कहा, ‘हमारी जांच में छात्राओं के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है।
इनमें से एक मामले में एंबुलेंस ड्राइवर को पिछले महीने गिरफ्तार भी किया गया था। जांच समिति की 38 पेज की रिपोर्ट में मामले की पुलिस की गहन जांच पूरी होने तक तथा निष्पक्ष जांच के लिए बनस्थली विद्यापीठ पर स्वतंत्र अनुभवी शिक्षाविद को प्रशासक नियुक्त किया जाना चाहिए।’
रिपोर्ट में मुख्य वार्डन विभा पारिक एवं वार्डन ललिता को निलंबित कर विभागीय जांच करने तथा आरोपी एंबुलेंस ड्राइवर नेहर को निलंबित करने का सुझाव भी दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ‘विशाखा फैसले’ के दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए गठित समिति के पुनर्गठन की जरूरत है।
छात्रावासों के निरीक्षण के दौरान जांच समिति ने पाया कि छात्राओं और अभिभावकों के बीच बातचीत करने की समुचित व्यवस्था नहीं है। छात्रावास एवं उसके आस पास न तो समुचित प्रकाश व्यवस्था है और न ही पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड लगाए गए हैं।
छात्रावासों में मोबाइल उपयोग के लिए स्पष्ट नीति बनाये जाने तक आउटगोइंग फोन बूथ लगाए जाने चाहिए ताकि छात्राओं को अनाधिकृत व्यक्तियों के जरिए मोबाइल एवं सिम खरीदने की आवश्यकता नहीं रहे। विद्यापीठ परिसर के बाहर छात्राओं को महंगी दरों पर मोबाइल व सिम मुहैया कराने वाले संचालक गैरी उर्फ गणपत सिंह पर भी मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। छात्रावासों में सायंकालीन भोजन के समय भोजन कक्ष में टेलीविजन पर समाचार देखने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति राज्यपाल ही होने चाहिए ताकि अनुशासन एवं प्रशासनिक गरिमा बनी रहे और उनकी भी जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। गत 5 अक्तूबर को विभिन्न समाचार पत्रों एवं मीडिया में विद्यापीठ में छात्राओं के साथ कथित दुष्कर्म एवं प्रताड़ित करने के समाचार प्रकाशित होने तथा उसके बाद उत्पन्न स्थिति के पश्चात आयोग ने जांच समिति गठित की थी।